
अंबिकापुर@ प्रणय राज सिंह राणा। Wadrafnagar Bypass Road: 8 साल का लंबा इंतजार, 15 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट और दावों की लंबी फेहरिस्त लेकिन नतीजा? बारिश और सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई। वाड्रफनगर बायपास सड़क निर्माण की यह जमीनी हकीकत लोक निर्माण विभाग के दावों की पोल खोल रही है। 2020 में बनकर तैयार होने वाली यह सड़क 30 मई 2026 को कागजों में फाइनली कम्प्लीट हुई, लेकिन एक ही बारिश यह झेल न सकी। सड़क पर डामर की जगह गहरे गड्ढे, जगह-जगह उखड़ी पपड़ी और बहता पानी दिख रहा है।
हालत यह है कि बाइक सवार किनारा ढूंढ रहे हैं और बड़ी गाड़ियां बायपास छोड़कर वापस शहर के भीतर से गुजरने को मजबूर हैं। पीडब्ल्यूडी रामानुजगंज डिवीजन ने 12 मार्च 2018 को 13 किलोमीटर सड़क के लिए 19.30 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला था। मेसर्स हर्ष कंस्ट्रक्शन (ठेकेदार संतोष सिंह) ने 15 करोड़ रुपए में यह काम लिया।
1 नवंबर 2018 को ही मशीनरी मोबलाइजेशन के लिए 18.91 लाख रुपए जारी कर दिए गए। 2 साल का काम 8 साल में घिसटता रहा और 30 मई 2026 को ठेकेदार ने 25वां व अंतिम बिल निकालकर काम पूरा होना दिखा दिया। विभागीय अफसर आंखें मूंदे बिल पास करते रहे। जनता के करोड़ों रुपए पानी में बह गए और जिम्मेदार अफसर व ठेकेदार अब भी खामोश हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क का क्रस्ट पूरी तरह फेल हो चुका है। ग्रैनुअल सब-बेस (जीएसबी) बिछाने के बाद सही कॉम्पेक्शन नहीं किया गया और बिना कॉम्पेक्शन रिपोर्ट के ही काम आगे बढ़ा दिया गया। सड़क का ढलान (कैंबर) सही न होने से पानी सड़क पर रुक रहा है, जिससे डामर उखड़ रहा है। चैनेज 4/4, 4/8, 5/2 और 6 में सड़क के नीचे से पानी रिस रहा है, जो गंभीर तकनीकी लापरवाही है।
मुख्य अभियंता ने भी जांच में कैंबर फेल होने की बात कही थी, फिर भी अंतिम भुगतान और एपीएस राशि जारी कर दी गई। खास बात यह है कि जिस एसडीओ विजय कुमार भारती की देखरेख में सब-ग्रेड और जीएसबी का काम हुआ, उन्होंने ही प्रभारी ईई रहते हुए इसका फाइनल बिल पास कर दिया।
कार्रवाई कब: मुख्य अभियंता द्वारा कैंबर फेल होने की रिपोर्ट दिए जाने के बाद भी विभाग ने ठेकेदार का अंतिम भुगतान और एपीएस राशि किस आधार पर जारी की।
जवाबदेही किसकी: क्या सब-ग्रेड में गड़बड़ी कराने वाले अफसरों और बिना कॉम्पेक्शन रिपोर्ट के फाइल ओके करने वाली पूरी टीम पर वित्तीय वसूली होगी।
ब्लैकलिस्ट कब: समयसीमा से 6 साल देरी और घटिया निर्माण के बावजूद ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया।