
अंबिकापुर। अंबिकापुर व शहर के आस-पास के क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। वन विभाग व प्रशासन की टीम ने पिछले कुछ महीनों में कार्रवाई कर वनभूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है। इसी कड़ी में वन विभाग द्वारा शहर से लगे तकिया पावर हाउस के पास वन भूमि पर अतिक्रमण कर मकान बना चुके लोगों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन (Bulldozer Action in Ambikapur) लिया गया है।
वन विभाग की टीम रविवार की सुबह मौके पर पहुंची और 17 अवैध मकानों को ढहा दिया। बताया जा रहा है कि अतिक्रमणकारियों की ओर से यह कहा गया था कि वे लंबे समय से यहां मकान बनाकर रह रहे हैं, उन्हें वन भूमि का पट्टा प्रदान नहीं किया गया। इस पर हाईकोर्ट ने प्रशासन व वन विभाग को जांच करने कहा था। जांच के बाद यह कार्रवाई की जा रही है।
शहर से लगे ग्राम पंचायत तकिया पावर हाउस के पास 20 लोगों ने वन भूमि पर अतिक्रमण कर मकान बनाए थे। इन सभी को वन विभाग की ओर से पूर्व में नोटिस जारी कर अतिक्रमण (Encroachment) हटाने कहा गया था। इसके बाद भी कई लोगों ने अतिक्रमण नहीं हटाया था। इसी बीच रविवार की सुबह वन विभाग की टीम प्रशासनिक व पुलिस अमले के साथ बुलडोजर लेकर अतिक्रमण हटाने पहुंची।
इस दौरान कई लोगों ने घरों से अपने सामान हटा लिए थे, जबकि कुछ लोगों ने नोटिस का पालन नहीं किया था। इस बीच वन विभाग ने 17 अवैध मकानों को चिह्नित कर उस पर बुलडोजर (Bulldozer action in Takiya) चलाकर जमींदोज कर दिया। अतिक्रमणकारियों का कहना है कि वे इस स्थान पर 20-30 सालों से मकान बनाकर रह रहे हैं, इसके बाद भी यह कार्रवाई की गई।
इस संबंध में भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने बताया कि उन पर ये आरोप लगते रहे हैं कि वे एक धर्म विशेष के लोगों को टारगेट कर उनके द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण को हटवाते हैं। उन्होंने कहा कि तकिया में जो मकान तोड़े जा रहे हैं, वहां जाकर देखिए कि किस धर्म के लोग हैं।
उन्होंने बताया कि 2 अप्रैल को हाईकोर्ट की ओर से यह कहा गया था कि जिन लोगों के द्वारा यह याचिका लगाई है कि उन्हें वनभूमि का पट्टा प्रदान नहीं किया गया, जबकि वे पात्र हैं। हाईकोर्ट ने 60 दिन में इसकी जांच कर प्रशासन व वन विभाग को जवाब देने कहा था। प्रशासन व वन भूमि ने जांच के बाद यह कार्रवाई (Bulldozer run on encroachment) शुरु की है। जांच में यह बात सामने आई कि अतिक्रमण बहुत पुराना नहीं है तथा वे वन भूमि पट्टा के पात्र नहीं हैं।
इस मामले में कांग्रेस के पूर्व पार्षद दीपक मिश्रा का कहना है कि पिछले 30-40 सालों से लोग यहां मकान बनाकर रह रहे हैं। उनके खिलाफ वन विभाग द्वारा कार्रवाई की जा रही है। उन्हें सामान निकालने तक का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यहां के रहवासी सांसद-विधायक से भी मिल चुके हैं।
उन्होंने कहा था कि आपलोगों का घर (No bulldozer action) नहीं टूटेगा। इसी वजह से लोग कोर्ट की शरण में नहीं गए और आज उनके मकान तोड़े जा रहे हैं। बारिश का सीजन सिर पर है, ऐसे में परिवार के लोग कहां जाएंगे।