
अंबिकापुर। राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (Ambikapur Medical College hospital) में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) का आंदोलन गुरुवार को तेज हो गया। 17 सूत्रीय मांगों को लेकर इंटर्न, पीजी और जूनियर डॉक्टरों ने 3 दिनों के लिए ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार कर दिया। मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में जेडीए के बैनर तले डॉक्टरों ने वाहन पार्किंग के लिए बने शेड में धरना दिया और मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने पर वे अनिश्चितकाल के लिए इमरजेंसी सेवाओं से भी दूरी बना सकते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कम स्टाइपेंड, 48 घंटे से अधिक ड्यूटी, सुरक्षा की कमी और अस्पताल में आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण डॉक्टरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि आंदोलन उनकी कार्यपरिस्थितियों और भविष्य को सुरक्षित करने की मांग को लेकर है।
पीजी और जूनियर डॉक्टरों (Junior Doctor's) के काम बंद करने से अस्पताल की नियमित सेवाओं पर असर पड़ा। लंबे समय बाद मेडिसिन विभाग की ओपीडी में सीनियर चिकित्सकों को मरीजों की संख्या संभालते देखा गया। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अवकाश के दिनों को छोडक़र प्रतिदिन करीब एक हजार मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं।
वहीं आईपीडी में भी बड़ी संख्या में मरीज भर्ती रहते हैं। पीजी और जूनियर डॉक्टर नियमित रूप से वार्डों में मरीजों की निगरानी करते हैं और किसी भी गंभीर स्थिति में सीनियर चिकित्सकों को इसकी जानकारी देते हैं। ऐसे में इनके हड़ताल पर जाने से मरीजों की निगरानी और उपचार व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
जेडीए के पदाधिकारियों के अनुसार, मांगों को लेकर प्रदेशभर में पहले भी आंदोलन किया गया था। बातचीत और आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित किया गया, लेकिन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से डॉक्टरों ने दोबारा आंदोलन शुरू किया है। डॉक्टरों ने 'एकजुटता ही हमारी ताकत है' का संदेश देते हुए मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही है।
जेडीए ने इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड (Intern Doctors) 15,900 से बढ़ाकर 30 हजार रुपए प्रतिमाह करने की मांग की है। पीजी डॉक्टरों के लिए 1.20 लाख रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड तथा बॉन्डेड एसआर और एमओ के मानदेय में पर्याप्त वृद्धि की मांग भी शामिल है। इसके अलावा सभी कैडर में वार्षिक वेतन वृद्धि, बॉन्ड अवधि में छूट और पारदर्शी नीति की मांग की गई है।
डॉक्टरों ने ड्यूटी आवर्स का पुनर्निर्धारण कर 48 घंटे की सीमा का सख्ती से पालन कराने, डॉक्टरों के लिए सुरक्षित आवास, आधुनिक उपकरण, पर्याप्त दवाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों के लिए विशेष भत्ता व प्रोत्साहन राशि, जिला अस्पतालों (District hospitals) में पर्याप्त विशेषज्ञों की नियुक्ति तथा दुर्घटना, आपातकाल और कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले डॉक्टरों के लिए बीमा व सुरक्षा कवच की मांग भी की गई है।