अंबिकापुर

NHRC ordered to CS: डॉक्टर-नर्सों की लापरवाही से हुई थी महिला की मौत, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार से कहा- दें 5 लाख का मुआवजा

NHRC ordered to CS: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को दिए निर्देश, अजा वर्ग की महिला की मौत के बाद भाजपा पार्षद ने की थी मामले की शिकायत
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NHRC ordered to CS
NHRC office (Photo- Wikipadia)

अंबिकापुर। शहर के दर्रीपारा निवासी एक महिला को उल्टी-दस्त की शिकायत पर जुलाई 2024 में मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था। यहां डॉक्टर ने दवा देकर उसे घर भेज दिया था। घर पर महिला की तबियत और ज्यादा बिगड़ गई तो अगले दिन उसकी बेटियां उसे फिर अस्पताल लेकर पहुंचीं थी। लेकिन डॉक्टर व नर्सों ने उसे भर्ती करने की जगह घर भेज दिया। ऐसे में महिला की मौत हो गई। इसकी शिकायत भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की थी। उनका कहना था कि डॉक्टर व नर्सों की लापरवाही से महिला की जान गई है। मामले की जांच के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव (NHRC ordered to CS) को महिला के परिजन को 5 लाख रुपए मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।

भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को 1 अगस्त 2024 को एक शिकायत पत्र भेजा था। इसमें उन्होंने उल्लेख किया था कि शहर के दर्रीपारा जेल तालाब निवासी महिला शांति मरावी 50 वर्ष को उल्टी-दस्त से पीडि़त थी। यह देख 27 जुलाई 2024 को उसकी 2 बेटियां उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NHRC ordered to CS) ले गईं।

BJP Ambikapur Councillor Alok Dubey who complaint to NHRC (Photo- Patrika)

यहां डॉक्टर ने इलाज के नाम पर कुछ दवा देकर उसे घर भेज दिया। घर पर महिला की तबियत और बिगड़ गई। इसके बाद 28 जुलाई को बेटियां फिर उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचीं। उन्होंने अस्पताल में पर्ची भी कटवाई। महिला की स्थिति काफी गंभीर थी, इसके बाद भी डॉक्टर व नर्सों (NHRC ordered to CS) ने उसे भर्ती कर इलाज कराना जरूरी नहीं समझा और पुन: उसे घर भेज दिया गया। इससे महिला की मौत हो गई।

शिकायत में उन्होंने बताया कि उस वक्त ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर व नर्सों की लापरवाही से ही महिला की जान चली गई। पार्षद ने इस बात का भी उल्लेख किया कि डॉक्टर-नर्सों की उक्त कार्यप्रणाली (NHRC ordered to CS) तानाशाही का परिचायक है तथा मानवीय दृष्टिकोण से अमानवीय कृत्य है। उन्होंने बताया कि यदि महिला को उस समय भर्ती कर लिया गया होता तो उसकी जान बच सकती थी तथा उसकी 2 बेटियों के सिर से मां का साया नहीं उठता।

NHRC ordered to CS: आयोग ने मामले का लिया संज्ञान

शिकायत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC ordered to CS) दिल्ली ने मामले को संज्ञान में लिया तथा सरगुजा कलेक्टर व एसपी से इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी। कलेक्टर ने 15 जनवरी 2025 को रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें लिखा कि शांति मरावी के इलाज में लापरवाही बरतने पर डॉक्टर व नर्स के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

उक्त बातें सीएमएचओ द्वारा 13 नवंबर 2024 की रिपोर्ट के आधार पर कही गईं। इस पर आयोग ने शिकायकर्ता पार्षद से 7 अक्टूबर 2025 की कार्रवाई के तहत टिप्पणियां (NHRC ordered to CS) मांगीं। इस पर पार्षद ने 31 अक्टूबर को जवाब पेश किया तथा दोषी कर्मचारियों को दी गई सजा की प्रकृति पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई।

5 लाख का मुआवजा देने के दिए निर्देश

शिकायतकर्ता के जवाब के बाद आयोग ने माना कि अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला की मृत्यु सरकारी अस्पताल में मेडिकल स्टाफ की लापरवाही से हुई। मामले की जांच के बाद आयोग ने छत्तीसगढ़ मुख्य सचिव (NHRC ordered to CS) को मृतका के परिजन को 5 लाख रुपए मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने 2 सप्ताह के भीतर मुआवजा भुगतान का सबूत भी पेश करने कहा है। वहीं आयोग ने यह भी कहा कि सरकार को यह अधिकार होगा कि मामले के दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों से मुआवजे की राशि वसूल करे। आयोग ने 24 जनवरी तक मामले की पूरी रिपोर्ट भेजने के भी निर्देश दिए हैं।

Updated on:
06 Jan 2026 07:26 pm
Published on:
06 Jan 2026 07:26 pm
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