HIGHLIGHTS Amy Cone Barrett Become Supreme Court Judge: अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विपक्ष के विरोध के वाबजूद भी सुप्रीम कोर्ट में एमी कोने बैरेट को नए जज के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। ट्रंप ने एमी कोने बैरेट को दिवांगत जस्टिस रूथ बेडर गिंसबर्ग की जगह पर सुप्रीम कोर्ट का नया जज बनाया है।
वाशिंगटन। अमरीका में आगामी 3 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव ( US Presidential Election 2020 ) होने वाले हैं और इसको लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है। दोनों ही पक्षों की तरह से तमाम तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। इस सियासी घमासान के बीच देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट की जज की नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है। हालांकि इसको लेकर विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है।
दरअसल, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विपक्ष के विरोध के वाबजूद भी सुप्रीम कोर्ट में एमी कोने बैरेट को नए जज के तौर पर नियुक्ति ( Amy Coney Barrett Become Supreme Court Judge ) को मंजूरी दे दी है। अमरीकी मीडिया के मुताबिक, ट्रंप ने एमी कोने बैरेट को दिवांगत जस्टिस रूथ बेडर गिंसबर्ग की जगह पर सुप्रीम कोर्ट का नया जज बनाया है।
फिलहाल, एमी की नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि शनिवार की शाम को ऐमी की नियुक्ति का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा।
आपको बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को ही ट्रंप ने ऐमी की नियुक्ति के साफ संकेत दे दिए थे। उन्होंने कहा था कि नाम तय कर लिया गया है और ये बहुत ही उत्साहित करने वाला है। हालांकि उन्होंने किसी के नाम का खुलासा नहीं किया था। लेकिन अब व्हाइट हाइस के ने रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों और सहयोगियों को इस बात की जानकारी दे दी है कि एमी कोने बैरेट को सुप्रीम कोर्ट का जज चुना गया है।
एमी कोने बैरेट की नियुक्ति का डेमोक्रेट कर रहे विरोध
आपको बता दें कि विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी एमी कोने बैरेट के सुप्रीम कोर्ट के नए जज के तौर पर नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं। डेमोक्रेट का कहना है कि चूंकि राष्ट्रपति चुनाव होने अब बस महज कुछ दिन शेष रह गए हैं ऐसे में नए जज की नियुक्ति का काम चुनाव के बाद नए राष्ट्रपति को करना चाहिए।
डेमोक्रेटिक पार्टी ने आरोप लगाया है कि 2016 में जब बराक ओबामा राष्ट्रपति थे तब रिपब्लिकन पार्टी ने करीब एक साल तक सुप्रीम कोर्ट में नए जज की नियुक्ति नहीं होने दी थी। जब डोनाल्ड ट्रंप चुनाव जीत गए तो उन्होंने अपनी पसंद से नील गोरसच को जज नियुक्त किया था।
मालूम हो कि डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल में अब तक सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की नियुक्ति कर चुके हैं। अब यदि वे एमी कोने बैरेट की नियुक्ति करते हैं तो अमरीकी सियासत में इसका काफी प्रभाव पड़ेगा और चुनाव में इसका काफी फायदा मिलने की उम्मीद है।
क्योंकि यदि कोर्ट में ट्रंप के पक्ष में जजों का झुकाव बढ़ता है, तो वे आसानी के साथ अपने सरकारी एजेंडा को आगे बढ़ा सकते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा होने पर ओबामाकेयर, गर्भपात का अधिकार, आव्रजन, टैक्सेशन और क्रिमिनल जस्टिस के मुद्दे पर रिपब्लिकन पार्टी को अगले 30 साल के लिए बढ़त मिल सकती है।
अमरीका में जज की नियुक्ति कैसे होती है?
आपको बता दें कि अमरीका में सुप्रीम कोर्ट के 9 सदस्यीय जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति और अमरीकी सीनेट द्वारा की जाती है। जब किसी नए जज की नियुक्ति होनी होती है तो उसका नाम अमरीकी राष्ट्रपति नोमिनेट करते हैं। इसके बाद सीनेट में इसको लेकर वोटिंग होती है।
समर्थन में वोट मिलने के बाद ही नोमिनेटेड सदस्य की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज होती है। चूंकि मौजूदा समय में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन सीनेट में बहुमत में है और ऐसे में उनके द्वारा नामित सदस्य को आसानी से सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जा सकता है।