
Illegal Arms Factory Case: अवैध हथियारों के निर्माण और तस्करी के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच अमरोहा पुलिस को एक अहम सफलता मिली है। थाना सैदनगली क्षेत्र में वर्ष 2021 में दर्ज अवैध शस्त्र फैक्ट्री मामले में अदालत ने दो हिस्ट्रीशीटर अपराधियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर कुल 20,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते यह फैसला सुनाया गया।
पुलिस के अनुसार, थाना सैदनगली में वर्ष 2021 में मु.अ.सं. 77/2021 के तहत धारा 3/5/25 आर्म्स एक्ट में अवैध शस्त्र फैक्ट्री संचालित किए जाने का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले की विवेचना और न्यायालय में प्रभावी पैरवी के बाद 10 जुलाई 2026 को अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
अदालत ने ग्राम ढक्का निवासी नविया पुत्र इस्माईल तथा कस्बा उझारी निवासी निशाद उर्फ चीपा पुत्र कमरुद्दीन, दोनों थाना सैदनगली, जनपद अमरोहा के रहने वाले आरोपियों को 10-10 वर्ष के कारावास से दंडित किया। साथ ही दोनों पर कुल 20,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
अमरोहा पुलिस ने बताया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। मजबूत पैरवी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई। पुलिस का कहना है कि संगठित अपराध और अवैध हथियारों के कारोबार के खिलाफ आगे भी इसी प्रकार प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस के अनुसार दोषी नविया पुत्र इस्माईल थाना सैदनगली का हिस्ट्रीशीटर अपराधी है। उसके खिलाफ अमरोहा जिले के विभिन्न थानों में गोकशी, अवैध शस्त्र रखने, चोरी तथा हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। लंबे समय से उसका नाम पुलिस के रिकॉर्ड में सक्रिय अपराधियों की सूची में शामिल रहा है।
दूसरे दोषी निशाद उर्फ चीपा पुत्र कमरुद्दीन के खिलाफ भी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 20 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह भी थाना सैदनगली का हिस्ट्रीशीटर अपराधी है और लंबे समय से विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में उसका नाम सामने आता रहा है।
इस फैसले को अमरोहा पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की बड़ी सफलता माना है। पुलिस का कहना है कि अवैध हथियारों के निर्माण, तस्करी और अन्य संगठित अपराधों में शामिल आरोपियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। न्यायालय का यह फैसला ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है कि कानून से बच पाना आसान नहीं है।