मदर्स डे (mothers day) पर जानिए एक मां के 27 साल के संघर्ष की कहानी, घर की जिम्मेदारी उठाने के साथ ही बेटियों को दिलाई इंजीनियरिंग व मेडिकल की शिक्षा..
अनूपपुर. मदर्स डे के मौके पर आज आपको हम एक मां के संघर्ष (struggle) की ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं जो मां की ममता और एक सशक्त नारी के दोनों रुपों को अपने अंदर समेटे हुए हैं। पति के निधन के बाद जब इस मां पर दो मासूम बेटियों (daughters) और घर की जिम्मेदारी आई तो मुश्किल हालातों में भी वो अडिग रही और खुद का रोजगार स्थापित कर न केवल समाज में अपना स्थान बनाया बल्कि अपनी दोनों बेटियों का भविष्य भी संवारा। हम बात कर रहे हैं अनूपपुर जिले की मीना गोकलानी की। मीना गोकलानी बीते 27 सालों से एक ब्यूटी पार्लर (beauty parlour) चला रही हैं और समाज की दूसरी महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं।
ब्यूटी पार्लर से संवारा बेटियों का भविष्य
जीवन की डगर में जब पति ने चंद फांसले चलने के बाद पत्नी मीना गोकलानी को हमेशा के लिए अलविदा कहा तो 27 वर्षीय मीना के लिए दो बच्चियों की परवरिश के साथ घर की जिम्मेदारी किसी मुसीबत के पहाड़ से कम नहीं थी। लेकिन मीना ने अपने हौसले को गिरने नहीं दिया, और स्वयं का रोजगार स्थापित कर एक नया मुकाम हासिल किया। मुश्किल हालातों के बीच मीना ने एक ब्यूटी पार्लर खोला और वही ब्यूटी पार्लर आज उनकी पहचान बन गया है। ब्यूटी पार्लर से होने वाली इनकम से ही खुद ही ब्यूटी पार्लर का संचालन कर अपनी पहचान बनाई तो बेटियों को इंजीनियरिंग और मेडिकल की शिक्षा देकर उसे अपने पैरों पर खड़े होने के काबिल बना दिया।
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27 साल का संघर्ष
मीना गोकलानी 19 वर्ष की आयु में शादी कर ससुराल पहुंची थी। लेकिन घर की स्थिति बेहतर नहीं थी। अभी जीवन के कुछ ही सफर गुजरे थे कि पति का निधन हो गया और मीना के सामने रह गई पहाड़ जैसी जिंदगी और दो मासूम बेटियां। परिवार की जिम्मेदारी सम्भालने के साथ ही उन पर बेटियों का भविष्य बनाने का बोझ था लिहाजा उन्होंने स्वयं के हुनर से रोजगार स्थापित किया और अपनी पहचान बनाने के साथ साथ बच्चों की परवरिश में जुट गई। वक्त आगे बढ़ता गया और मुश्किल दौर भी गुजर गया आज बिजुरी नगर में मीना गोकलानी एक सफल महिला के साथ मां के रूप में भी पहचानी जाती है। मीना बताती है कि पारिवारिक परिस्थितियों में खुद कुछ करने की इच्छा मन में थी और घरवालों का सहयोग मिल गया। 27 वर्ष पूर्व उसने ब्यूटी पार्लर प्रारंभ किया, तब मन में झिझक भी थी। साथ ही यह भी लगता था कि यह काम चलेगा भी या नहीं। लेकिन अपनी मेहनत और लगन से इसी के दम पर वह पूरे घर को चला रही हैं।