
Ashoknagar news: सरकारी दफ्तरों में आम आदमी को किस तरह चक्कर कटवाकर उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जाता है, इसका एक और ताजा उदाहरण सामने आया है। हालांकि, इस बार भ्रष्ट तंत्र पर ग्वालियर लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को लोकायुक्त टीम ने बिजली कंपनी के एक लाइनमैन को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। जैसे ही ट्रैप के बाद आरोपी के हाथ धुलवाए गए, पानी का रंग गुलाबी हो गया और रिश्वतखोर लाइनमैन के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं।
जानकारी के मुताबिक, पिपरई थाना क्षेत्र के ग्राम कुकररेठा निवासी श्रीराम बैरागी ने अपनी आटा चक्की चलाने के लिए एसएसपी की मोटर हेतु बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था। काफी समय बीत जाने और दफ्तर के कई चक्कर काटने के बाद भी जब उनका काम नहीं हुआ, तो उन्होंने संबंधित विद्युत कार्यालय में संपर्क किया। वहां उनकी मुलाकात लाइनमैन बाबूराम पटेल से हुई। बाबूराम ने कनेक्शन की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में श्रीराम बैरागी से 10 हजार रुपए की मांग की थी।
रिश्वतखोर लाइनमैन की इस मांग से परेशान होकर श्रीराम बैरागी ने ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक से मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही लोकायुक्त ने मामले को पूरी गंभीरता से लिया और गुप्त रूप से इसका सत्यापन कराया। जब यह पक्का हो गया कि लाइनमैन वाकई में रिश्वत मांग रहा है, तो उसे रंगे हाथों पकड़ने की एक पुख्ता रणनीति तैयार की गई।
शुक्रवार को ग्वालियर लोकायुक्त की टीम निरीक्षक उपेंद्र दुबे के नेतृत्व में अशोकनगर पहुंची। योजना के अनुसार, शिकायतकर्ता श्रीराम बैरागी ने लाइनमैन बाबूराम पटेल से मुलाकात की और तय हुई 10 हजार की रकम में से पहली किश्त के रूप में 5 हजार रुपए उसे सौंपे। जैसे ही लाइनमैन ने नोटों की गड्डी अपनी जेब में रखी, आसपास सादे कपड़ों में मुस्तैद लोकायुक्त टीम ने उसे धर दबोचा।
अचानक हुई इस सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई से आरोपी हक्का-बक्का रह गया। मौके पर कार्रवाई के बाद लोकायुक्त टीम आरोपी को पास ही स्थित एक रेस्टोरेंट में ले गई, जहां रिश्वत की राशि जब्त करने के साथ ही मामले से जुड़े आवश्यक दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाए गए। इस कार्रवाई ने जिले के भ्रष्ट कर्मचारियों में हड़कंप मचा दिया है। कार्रवाई में निरीक्षक उपेंद्र दुबे के साथ ग्वालियर लोकायुक्त टीम के कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। फिलहाल आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।