
Ashoknagar News: कल्पना कीजिए कि जो बच्चा जन्म से न कुछ सुन सकता हो और न बोल सकता हो, लेकिन एक दिन अचानक वह मम्मी-पापा कहकर पुकारे। जिले में ऐसा ही चमत्कार देखने मिला है, जो कान की सर्जरी होते ही दो वर्षीय बच्चा जहां सुनने तो लगा ही, साथ ही अब बोलने भी लगा है।
अशोकनगर के मुंगावली क्षेत्र के निवासी धर्मेंद्र केवट का पुत्र दो वर्षीय मोनू केवट (Monu Kewat emotional story) जन्म से ही सुन नहीं पाता था और दो साल की उम्र हो जाने के बाद भी बोल भी नहीं। पाता था। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत इस बच्चे की जटिल बीमारी देख इसे ऑपरेशन के लिए चिन्हित किया गया।
आरबीएसके मेडिकल ऑफीसर डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि कलेक्टर साकेत मालवीय के निर्देश पर इस बच्चे को चिन्हित किया गया और सीएमएचओ डॉ. अलका त्रिवेदी ने उसकी सर्जरी के लिए साढ़े 6 लाख रु. स्वीकृत किए। भोपाल में जुलाई माह में उसकी कोकलियर इंप्लांट सर्जरी कराई गई, जिसकी थैरेपी चल रही है। इससे वह सुनने के साथ बोलने भी लगा है। धर्मेंद्र केवट ने बताया कि मोनू अब मम्मी-पापा और दादा कहने लगा है।
कस्बारेंज निवासी चार वर्षीय आतिफ खान भी जन्म से बोल व सुन नहीं पाता है। इसका भी आरबीएसके के तहत तहत भोपाल में कोकलियर इंप्लांट सर्जरी कराई गई है। सर्जरी के बाद इसकी आठ थैरेपी होंगी। डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि थैरेपी शुरू होने के साथ आतिफ भी सुनने तो लगेगा ही साथ ही बोलने भी लगेगा। डॉ. सौरभशर्मा का कहना है कि जन्म से ऐसी जटिल बीमारियों से पीड़ित एक से पांच-छह साल तक की उम्र के बच्चों के लिए इस तरह की जटिल बीमारियों का राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कई बच्चों की सर्जरी कराई जा चुकी हैं।
डॉक्टर के मुताबिक कोकलियर इंप्लांट एक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो बहरे या कम सुनने वाले लोगों के लिए इस्तेमाल की जाती है। यह मशीन कान के अंदरूनी हिस्से में लगाई जाती है। यह सीधे श्रवण ग्रंथि के पास संदेश भेजती है, जिससे मस्तिष्क को ध्वनि के संकेत मिलते हैं और जन्म से बहरा व्यक्ति भी सुनने लगता है। सुनने की क्षमता विकसित होने के साथ ही बच्चा बोलना भी सीख जाता है।