धर्म/ज्योतिष

छोटी दिवाली कब मनाई जाएगी? 7 या 8 नवंबर, जानें नरक चतुर्दशी और दीपदान का सही मुहूर्त

Choti Diwali 2026 date: छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi) का पर्व इस बार दो अलग-अलग तारीखों पर मनाया जाएगा। 7 नवंबर को यम दीपदान और 8 नवंबर को अभ्यंग स्नान होगा।
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Updated: 4 Nov 2026, 3:09 PM IST
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Choti Diwali 2026 date: नरक चतुर्दशी और दीपदान का सही मुहूर्त (फोटो सोर्स- ChatGPT)

Choti Diwali 2026 date: दीपोत्सव में छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi) को भी बहुत अहम दिन माना जाता है। कार्तिक महीने की चतुर्थ तिथि में मनाई जाने वाली छोटी दीपावली का संबंध भगवान विष्णु के आंठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण और देव यमराज से है। इस बार 7 नवंबर को छोटी दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घरों में दीये जलाने के अलावा देवता यमराज के नाम पर भी दीपदान करने की परंपरा है।

रूप चौदस के नाम से भी जानी जाती है छोटी दीपावली (Choti Diwali 2026 Roop Chaudas)

छोटी दिवाली को रूप चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। छोटी दिवाली रूप चौदस इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन सौंदर्य, निखार और आरोग्य (स्वास्थ्य) पाने के लिए विशेष रूप से अभ्यंग स्नान और दीपदान करने की परंपरा है।

अभ्यंग स्नान और तिथि (Choti Diwali 2026 Abhyanga Snan Muhurat)

7 नवंबर शनिवार को सुबह 10.48 बजे से चतुर्दशी तिथि शुरू होकर 8 नवंबर को सुबह 11.28 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में चतुर्दशी तिथि मिलने के कारण 7 नवंबर की शाम यमराज के निमित्त दीपदान किया जाएगा। वहीं अरुणोदय और उदया तिथि के आधार पर 8 नवंबर रविवार को नरक चतुर्दशी और रूप चौदस का अभ्यंग स्नान किया जाएगा।

छोटी दिवाली 2026 की पूजा का शुभ मुहूर्त (Choti Diwali 2026 Shubh Muhurat)

छोटी दिवाली के दिन अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व होता है। इस बार अभ्यंग स्नान का शुभ समय 8 नवंबर 2026 को सुबह 5 बजकर 41 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। चंद्रोदय का समय शाम 5 बजकर 41 मिनट है।

दीपदान का शुभ मुहूर्त (Choti Diwali 2026 Deepdaan Muhurat)

दीपदान के लिए गोधूलि और सायंकाल का समय शुभ माना गया है। गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 31 मिनट से 5 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। वहीं, सायाह्न संध्या मुहूर्त शाम 5 बजकर 31 मिनट से 6 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।

नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा (Choti Diwali 2026 Katha)

किवदंती है कि, नरकासुर नाम का एक राक्षस था। उसने अपनी ताकत के दम पर 16 हजार महिलाओं को बंदी बना लिया था। उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं और ऋषि-मुनियों ने भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगी। इसके बाद भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर दिया और सभी 16 हजार महिलाओं को उसकी कैद से आजाद कराया। नरकासुर के अंत की खुशी में लोगों ने अपने घरों में दीप जलाए और खुशियां मनाईं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तभी से नरकासुर के वध की खुशी में छोटी दिवाली मनाने की परंपरा शुरू हुई। इसी वजह से इस त्योहार को नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है।

Updated on:
4 Nov 2026, 3:09 PM IST
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