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Diwali 2026: दीपावली की पूजा के बाद कौनसा पटाखा जलाना होता है शुभ, जानें किस वाहन से होगा मां लक्ष्मी का आगमन

Diwali puja firecrackers: दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन के बाद पटाखे जलाने की परंपरा है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, माता लक्ष्मी गज यानी हाथी पर सवार होकर भक्तों की झोली भरने आ रही है।
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भारत

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Akash Dewani

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Updated: 31 Oct 2026, 1:47 PM IST

diwali puja firecrackers Goddess Lakshmi arrive on elephant

Diwali puja firecrackers: दीपावली की पूजा के बाद कौनसा पटाखा जलाना होता है शुभ (फोटो सोर्स- Pexels)

Diwali Puja Firecrackers:दीपावली (Diwali 2026) का महापर्व 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस बार दीपावली पर बुधादित्य योग और माता महालक्ष्मी के गज वाहन पर आगमन का संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय के अनुसार, इसे व्यापार, व्यवसाय और कृषि के लिए शुभ संकेत माना जाता है। लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए शाम 6.11 से रात 8.09 बजे तक वृषभ स्थिर लग्न का मुहूर्त बताया है। श्री मातंगी ज्योतिष केंद्र के ज्योतिर्विद पं. अजय व्यास ने बताया कि बुधादित्य योग को आत्मबल, नेतृत्व, प्रतिष्ठा और प्रशासन से जोड़कर देखा जाता है। रविवार और गज वाहन का संयोग समृद्धि, तेज और जनकल्याण का प्रतीक माना गया है।

Diwali 2026: प्रदोष और महानिशीथ काल में लक्ष्मी पूजा का महत्व

प्रदोष काल शाम 5.45 से रात 8.19 बजे तक रहेगा। वहीं, महानिशीथ काल रात 1.25 से 3.25 बजे तक बताया गया है। शाक्त परंपराओं में इस अवधि को महालक्ष्मी की आराधना, शक्ति उपासना, मंत्र जप और ध्यान के लिए विशेष महत्व दिया जाता है।

Diwali 2026 शुभ मुहूर्त: अमृत चौघड़िया में शुरू करें नए काम

ज्योतिर्विद पं. अजय व्यास के अनुसार, चौघड़िया गणना के मुताबिक, सुबह 10.42 से दोपहर 12.04 बजे तक अमृत चौघड़िया का शुभ समय रहेगा। इसे नए अस्पताल, क्लिनिक, मेडिकल स्टोर, डायग्नोस्टिक सेंटर के उद्घाटन के साथ ही नई नौकरी शुरू करने या पदभार ग्रहण करने के लिए अनुकूल माना गया है। इस दिन स्वाति नक्षत्र का प्रभाव भी रहेगा, जिसे स्वतंत्रता, गति और विस्तार का प्रतीक माना जाता है।

Diwali 2026: लक्ष्मी-गणेश और सरस्वती पूजा का महत्व, जानें धार्मिक मान्यता

दीपावली पर महालक्ष्मी के साथ गणेश और सरस्वती पूजन की परंपरा समृद्धि, विवेक और ज्ञान के संतुलन का संदेश देती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता लक्ष्मी का कमल आसन पवित्रता और अनासक्ति, चार भुजाएं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, कमल पुष्प निर्मलता तथा स्वर्ण मुद्राएं समृद्धि और लोककल्याण की प्रतीक हैं। वहीं, वरद और अभय मुद्राएं कृपा तथा निर्भयता का संदेश देती हैं। दीपावली को अंधकार से प्रकाश, अज्ञान से ज्ञान और असत्य से सत्य की ओर बढ़ने का पर्व माना जाता है।

Diwali 2026: लक्ष्मी पूजा के बाद कौनसे पटाखे जलाना शुभ? जानें अनार, चकरी और फुलझड़ी का महत्व

ज्योतिषाचार्य अमर डब्बवाला ने बताया कि पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की कृष्ण-पक्ष अमावस्या पर प्रदोष काल में यानी दीपावली के दिन माता लक्ष्मी के पूजन की मान्यता है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धर्मसिंधु शास्त्र में बताया गया है कि मां लक्ष्मी की पूजा के बाद उल्का-दर्शन की धार्मिक परंपरा का वर्णन मिलता है, जिसे सामान्य भाषा में पटाखों से जोड़ा जा सकता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण पटाखा अनार और चकरी को माना जाता है जिससे ज्योति उत्पन्न होती है। आतिशबाजी की बात की जाए तो उसमे फुलझड़ी जलाने की बात सामने आती है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, यह परंपरा रामायण काल से चलती हुई आ रही है।