Garuda Purana Rebirth: हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। इसमें भगवान विष्णु और गरुड़ जी के संवाद के माध्यम से जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म के रहस्यों को समझाया गया है। इस ग्रंथ के अनुसार मृत्यु अंत नहीं है, बल्कि आत्मा की एक नई यात्रा की शुरुआत है।
Garuda Purana Rebirth: गरुड़ पुराण, जीवन केवल शरीर तक सीमित नहीं है, देह तो आत्मा का एक अस्थायी आवरण मात्र है। जब यह शरीर समाप्त होता है, तब अस्तित्व समाप्त नहीं होता बल्कि एक नई यात्रा आरंभ होती है। अध्यात्म का मूल ज्ञान यही है कि मान-अपमान, लाभ-हानि और जन्म-मृत्यु से परे आत्मा शाश्वत है। मृत्यु को इसलिए अंत नहीं, बल्कि परिवर्तन का क्षण माना गया है एक ऐसा द्वार जो भौतिक जगत से सूक्ष्म जगत की ओर खुलता है।गरुड़ पुराण के अनुसार जन्म और मृत्यु एक चक्र की तरह हैं। जन्म लेते ही समय का पहिया मृत्यु की ओर बढ़ने लगता है, और मृत्यु होते ही आत्मा अगले जीवन की ओर अग्रसर हो जाती है। यही सतत प्रवाह पुनर्जन्म का सिद्धांत है, जहां आज के कर्म ही कल के अस्तित्व का आधार बनते हैं।
गरुड़ पुराण के अनुसार जब मनुष्य की मृत्यु होती है, तब उसकी आत्मा सूक्ष्म शरीर धारण कर यमलोक की ओर प्रस्थान करती है। वहां यमराज और चित्रगुप्त उसके समस्त कर्मों का लेखा-जोखा देखते हैं। कहा जाता है कि यदि विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाए तो आत्मा की यात्रा सरल हो जाती है। लेकिन यदि संस्कार अधूरे रह जाएं, तो आत्मा कुछ समय तक अपने घर-परिवार के आसपास भटक सकती है। इसलिए सनातन परंपरा में दाह संस्कार और पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है।
ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि मृत्यु के बाद आत्मा 13 दिनों तक पृथ्वी लोक के आसपास रहती है। इस दौरान परिवारजन श्राद्ध और तर्पण के माध्यम से आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। इसके बाद आत्मा यमलोक की कठिन यात्रा पर निकलती है। वैतरणी नदी को पार करना, विभिन्न पड़ावों से गुजरना और अंततः चित्रगुप्त के सामने अपने कर्मों का सामना करना यह पूरी प्रक्रिया आत्मा को उसके कर्मों का बोध कराती है।
गरुड़ पुराण स्पष्ट करता है कि मनुष्य का अगला जन्म उसकी मृत्यु के बाद नहीं, बल्कि जीवनभर किए गए कर्मों से पहले ही निर्धारित हो जाता है। अंतिम समय में मन की स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण मानी गई है। अगर व्यक्ति का मन शांत, ईश्वर में लीन और सकारात्मक भाव से भरा हो, तो उसे उच्च लोक या श्रेष्ठ योनि प्राप्त होती है। वहीं लालच, क्रोध और छल से भरा मन आत्मा को निम्न योनि या कष्टमय जीवन की ओर ले जा सकता है।
मित्रता को पवित्र संबंध माना गया है, लेकिन जो लोग स्वार्थवश अपने मित्र को धोखा देते हैं, उनके लिए भी गंभीर परिणाम बताए गए हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार विश्वासघात करने वाला व्यक्ति अगले जन्म में ऐसी योनि प्राप्त कर सकता है, जो उसके छल और लालच का प्रतीक हो। यह संकेत देता है कि संबंधों में बेईमानी आत्मा को पतन की ओर ले जाती है।
जो व्यक्ति झूठ, चालाकी या कपट से दूसरों को भ्रमित करता है और स्वार्थ के लिए सत्य छिपाता है, वह अपने कर्मों से आत्मा को नीचे गिराता है। शास्त्रों में कहा गया है कि ऐसे कर्म अगले जन्म में अज्ञान और अंधकार से जुड़े रूप में फलित हो सकते हैं। यह शिक्षा देती है कि सत्य और नैतिकता ही आत्मा को ऊंचा उठाते हैं, जबकि छल-कपट पुनर्जन्म के चक्र में कष्ट बढ़ा सकते हैं।