धर्म/ज्योतिष

Holi 2026 Chandra Grahan: 100 साल में बाद होली पर चंद्र ग्रहण का साया, 3 मार्च को बन रहा खास योग, जानें जरूरी नियम और सावधानियां

Holi 2026 Chandra Grahan: साल 2026 की होली सिर्फ रंगों और खुशियों की वजह से ही खास नहीं होगी, बल्कि इस बार आसमान में भी एक अनोखा नजारा देखने को मिलेगा।मान्यता है कि ऐसा दुर्लभ संयोग लगभग 100 साल बाद बन रहा है।

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Feb 22, 2026
3 March 2026 Chandra Grahan|फोटो सोर्स- Freepik

Holi 2026 Chandra Grahan: इस साल होली का पर्व एक विशेष खगोलीय घटना के साथ जुड़ रहा है। 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है और खास बात यह है कि यह रंगों के त्योहार होली के आसपास पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का प्रभाव पूजा-पाठ, रंग खेलने और दैनिक कार्यों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में जानना जरूरी है कि इस दिन क्या करें, क्या न करें और किन सावधानियों का पालन करना चाहिए।

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क्यों कहा जा रहा है इसे ‘सदी का संयोग’?

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया, यानी अम्ब्रा (Umbra) से होकर गुजरता है। इस दौरान चंद्रमा तांबे या लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे आम भाषा में “ब्लड मून” कहा जाता है।होली की अग्नि की रात के तुरंत बाद आकाश में लालिमा लिए चंद्रमा का दिखना एक अद्भुत दृश्य होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा दुर्लभ संयोग लगभग 100 साल बाद बन रहा है।

भारत में लगने वाले चंद्र ग्रहण में क्या सूतक काल लगेगा?

2026 में 3 मार्च को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जिसके कारण इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बढ़ जाता है।ग्रहण का समय 3 मार्च 2026 को दोपहर 03:19 बजे से शुरू होकर शाम 06:47 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है, यानी 3 मार्च की सुबह से ही सूतक प्रभावी माना जाएगा और उसी अनुसार पूजा-पाठ व अन्य कार्यों में सावधानी बरतनी होगी।

Chandra Grahan 2026 Do’s & Don’ts:जरूरी सावधानियां

  • ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।
  • ग्रहण काल में भोजन न करें; यदि आवश्यक हो तो पहले से तैयार भोजन में तुलसी के पत्ते डालकर रखें।
  • ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
  • मंदिरों के कपाट ग्रहण काल में बंद रखे जा सकते हैं।

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