धर्म/ज्योतिष

Malmaas 2026: मलमास में मृत्यु होना शुभ या कोई अशुभ संकेत? जानें अधिकमास में मृत्यु का रहस्य

Adhik Maas 2026 : अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक उन्नति का समय माना जाता है। यह हर लगभग तीन वर्ष में आता है। ऐसे में इस माह में मृत्यु को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं, क्या यह शुभ है या कोई अशुभ संकेत?

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Apr 28, 2026
Hindu astrology death in Malmaas|Freepik

Malmaas 2026 Death Facts:मलमास 2026 को लेकर लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि इस दौरान मृत्यु होना शुभ होता है या अशुभ संकेत। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अधिकमास यानी मलमास आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस महीने में जहां मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है, वहीं मृत्यु को मोक्ष प्रदान करने वाला समय भी माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में देह त्यागने वाले व्यक्ति को विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं जयपुर के पंडित प्रमोद शर्मा से मलमास में मृत्यु से जुड़ी मान्यताओं और इसके रहस्य के बारे में विस्तार से।

ईश्वर की शरण में जाने का मार्ग

मलमास 17 मई 2026 (रविवार) से 15 जून 2026 (सोमवार) तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस अवधि में शरीर त्यागता है, उसकी आत्मा सीधे ईश्वर की शरण में पहुंचती है। ऐसी मृत्यु को सामान्य नहीं, बल्कि एक दिव्य अवसर माना जाता है, जहां आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल सकती है।

पापों से मुक्ति और मोक्ष का द्वार

कहा जाता है कि अधिकमास में मृत्यु होने पर व्यक्ति के पिछले कर्मों का भार कम हो जाता है। यह समय आत्मा की शुद्धि का होता है, इसलिए मृत्यु को एक तरह से मोक्ष का द्वार भी माना जाता है। यह सोच भय को कम करके एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण देती है।

क्या करें अगर इस समय निधन हो जाए?

अगर किसी का देहांत इस माह में होता है, तो परिवार को घबराने के बजाय श्रद्धा और शांति के साथ कर्मकांड करने चाहिए। पिंडदान, दान-पुण्य और भगवान का स्मरण आत्मा की शांति के लिए लाभकारी माना जाता है।

“मलमास” नाम से जुड़ी भ्रांतियां

“मलमास” शब्द सुनकर कई लोग इसे अशुभ समझ लेते हैं, जबकि सच्चाई इससे अलग है। यहां “मल” का अर्थ अपवित्र नहीं, बल्कि अतिरिक्त समय से है, एक ऐसा समय जो विशेष रूप से ईश्वर की साधना के लिए मिला है। इसलिए इसमें मृत्यु को भी अशुभ नहीं, बल्कि एक अलग आध्यात्मिक घटना के रूप में देखा जाता है।

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Published on:
28 Apr 2026 02:03 pm
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