धर्म/ज्योतिष

पिशाच योग क्यों माना जाता है सबसे खतरनाक, इन ग्रहों के कारण बनता है ये योग

शनि–राहु योग को ज्योतिष में अत्यंत प्रभावशाली और चुनौतीपूर्ण माना गया है। यह योग जीवन में बाधाएं, मानसिक तनाव और रहस्यमय अनुभव दे सकता है, लेकिन सही उपाय, भक्ति और सात्विक जीवनशैली से इसके दुष्प्रभाव कम किए जा सकते हैं।

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Jan 05, 2026
पिशाच योग (pc: gemini generated)

ज्योतिष में कुछ ग्रह योग ऐसे माने जाते हैं जिनका नाम सुनते ही लोगों के मन में भय पैदा हो जाता है। इन्हीं में से एक है शनि और राहु का योग। जब कुंडली में शनि और राहु एक साथ बैठ जाएं या शनि की दृष्टि राहु पर पड़ जाए, तो इसे शनि का सबसे नकारात्मक योग माना जाता है। लोक मान्यताओं में इसे नंदी योग या पिशाच योग भी कहा जाता है।

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शनि–राहु योग क्या है?

जब शनि और राहु का आपसी संबंध बनता है—चाहे युति के रूप में या दृष्टि के माध्यम से—तो कुंडली में यह योग बनता है। ज्योतिष के अनुसार शनि कर्म और पूर्व जन्म के प्रारब्ध का कारक है, जबकि राहु रहस्य, भ्रम और मायाजाल का प्रतीक है। इन दोनों का मेल व्यक्ति के जीवन में गहरे और रहस्यमय प्रभाव डालता है।

शनि–राहु योग के नकारात्मक प्रभाव

इस योग से ग्रस्त व्यक्ति को जीवन में बार-बार अज्ञात बाधाओं का सामना करना पड़ता है। परेशानियां आती हैं, लेकिन उनके कारण समझ में नहीं आते। ऐसे लोगों में नशे की प्रवृत्ति, रूखा स्वभाव, कर्कश वाणी और अकेलापन देखा जाता है। मानसिक स्तर पर डर, घबराहट, अजीब कल्पनाएं और रहस्यमय रोग हो सकते हैं। कई बार व्यक्ति को लगता है कि कोई नकारात्मक शक्ति उसे परेशान कर रही है। शनि–राहु योग वाले लोग अक्सर तंत्र-मंत्र, ऑकल्ट और रहस्यमय विद्याओं की ओर आकर्षित हो जाते हैं।

विशेष शक्तियां भी देता है यह योग

ज्योतिष मान्यता के अनुसार यह योग केवल नकारात्मक ही नहीं होता। कुछ लोगों में इससे अतींद्रिय क्षमता बढ़ जाती है। भविष्य की घटनाओं का अनुमान, तंत्र साधना में रुचि और रहस्यमय विषयों की समझ इन्हें मिल सकती है। लेकिन नकारात्मक दिशा में जाने पर इसका परिणाम घातक हो सकता है।

शनि–राहु योग से बचाव के उपाय

अगर आपकी कुंडली में यह योग है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सही उपायों से इसके दुष्प्रभाव कम किए जा सकते हैं। रोज सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करें। सुबह और शाम गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें, क्योंकि यह पूर्व जन्म के कर्मों के प्रभाव को कम करता है।

हर एकादशी का व्रत रखें। पंचमुखी या दशमुखी रुद्राक्ष धारण करें और खान-पान में पूर्ण सात्विकता रखें। नकारात्मक साधनाओं से दूर रहकर भक्ति और संयम का मार्ग अपनाएं।

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Updated on:
05 Jan 2026 10:37 am
Published on:
05 Jan 2026 10:36 am
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