
Ram Mandir Trust News: अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में लगातार हो रहे बदलावों के बीच एक और बड़ा फैसला लिया गया है। चंपत राय के इस्तीफे के बाद अब भैयाजी जोशी को भी मंदिर के पालक पद से हटा दिया गया है। भैयाजी जोशी लंबे समय से ट्रस्ट की बैठकों में शामिल होते रहे थे और संगठन की ओर से उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। चढ़ावा चोरी मामले, एफआईआर विवाद और चंपत राय के पत्र के बाद ट्रस्ट में जिम्मेदारियों को लेकर लगातार बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में भैयाजी जोशी को पालक पद से हटाने का फैसला भी काफी अहम माना जा रहा है।
राम मंदिर ट्रस्ट बनने और जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर हुए विवाद के बाद संघ नेतृत्व ने स्वास्थ्य कारणों से सर कार्यवाह पद छोड़ चुके भैयाजी जोशी को राम मंदिर का पालक बनाया था। उनका कार्यक्षेत्र लखनऊ रखा गया था। इसी जिम्मेदारी के चलते वह ट्रस्ट की बैठकों में नियमित रूप से शामिल होते थे और कई अहम फैसलों के दौरान मौजूद रहते थे।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई नाम चर्चा में आए। इसी दौरान मंदिर पालक को लेकर भी सवाल उठे, हालांकि उनकी ओर से कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया गया। 12 जून को लखनऊ में ट्रस्ट पदाधिकारियों की बैठक में वह मौजूद रहे। इससे पहले 6 जून को चढ़ावा चोरी की एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे चंपत राय को रोकने में उनकी भूमिका होने की आशंका भी जताई गई थी, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
अब उन्हें पालक पद से मुक्त किए जाने को भी उसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। यह भी माना जा रहा है कि एफआईआर दर्ज न होने की वजह ही चंपत राय के इस्तीफे का सबसे बड़ा कारण बनी।
छह जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार किए जाने की घोषणा हुई। इसके अगले दिन, 7 जुलाई को उन्होंने एक पत्र सार्वजनिक किया। इस पत्र में चढ़ावा गिनती के अनुबंध से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की गई। पत्र में चंपत राय ने लिखा, फिलहाल मैं मौन हूं लेकिन एसआईटी की जांच के बाद हर सवाल का उत्तर दूंगा। उन्होंने आगे कहा कि कलंक लेकर नहीं जाऊंगा।
चंपत राय के इस पत्र के बाद संगठन के शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ गई थी। आशंका थी कि मामला आगे और न बढ़ जाए। इसी वजह से उन्हें समझाने और स्थिति को शांत रखने की कोशिशें भी की गईं। बताया जाता है कि कई लोगों ने उनके समर्थन में भी बात की और उन्हें भरोसा दिलाने का प्रयास किया।