
Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर में चढ़ावे के पैसे चोरी होने के मामले की जांच कर रही टीम SIT को उत्तर प्रदेश सरकार ने थोड़ा और समय दे दिया है। अब यह टीम 15 जुलाई तक अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप सकती है। पहले इसे 30 जून तक ही रिपोर्ट देनी थी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। अब दान में मिली रकम की हेराफेरी के साथ-साथ मंदिर निर्माण के लिए पिछले कुछ वर्षों में खरीदी गई जमीनों के सौदों की भी जांच की जाएगी।
लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत की निगरानी में बनी तीन सदस्यों की टीम ने अपनी पहली रिपोर्ट सरकार को दे दी है। इस शुरुआती रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मंदिर में दान के पैसे गिनने के तरीके में बड़ी लापरवाही और गड़बड़ियां थी। टीम ने अयोध्या में 6 दिनों तक रुककर करीब 150 कर्मचारियों से पूछताछ की और CCTV फुटेज देखें, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इसी जांच के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर पैसे गिनने वाले 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से 80 लाख रुपये भी बरामद किए हैं।
SIT की जांच में मंदिर की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। जब टीम ने CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी, तो पता चला कि कई दिनों के जरूरी फुटेज गायब या डिलीट थे। फुटेज से यह भी पता चला कि जब कर्मचारी दान पेटी से पैसे निकालते थे, तो वे जानबूझकर कैमरे के सामने खड़े हो जाते थे ताकि उनकी चोरी पकड़ी न जा सके। जांच टीम फिलहाल लखनऊ में इन कैमरों के बैकअप और पेन ड्राइव में लिए गए डेटा की तकनीकी जांच कर रही है।
जांच के दौरान ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या पहुंचकर लोगों से कहा था कि अगर किसी के पास इस मामले से जुड़ा कोई भी सबूत हो, तो वह जांच टीम को दे सकता है। इसके बाद आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने टीम से मुलाकात की और आरोप लगाया कि मंदिर के लिए जो जमीनें खरीदी गई, उनमें बड़ा घोटाला हुआ है। उन्होंने इसके सबूत भी टीम को दिए। मामला गंभीर होने के कारण सरकार ने अब जमीन खरीद की जांच भी इसी टीम को सौंप दी है।
जांच टीम के चीफ विजय विश्वास पंत ने बताया कि अभी कई कागजातों और बैंक खातों की जांच करना बाकी है। माना जा रहा है कि 15 जुलाई को आने वाली फाइनल रिपोर्ट में सिर्फ छोटे कर्मचारी ही नहीं, बल्कि मंदिर प्रबंधन के उन बड़े लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है जिनकी लापरवाही की वजह से यह सब हुआ।