
राम मंदिर दान विवाद केस में नया अपडेट। फोटो सोर्स-Ai
Ayodhya Ram Mandir Donation Controversy Update:अयोध्याराम मंदिर विवाद को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। संतों ने एकजुट होकर बड़ा संकल्प लिया है। राम मंदिर के दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। स्थानीय साधु-संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। संत समाज ने एकजुट होकर "चंपत भगाओ, अयोध्या बचाओ" अभियान चलाने का संकल्प लिया है। इस घोषणा के बाद मंदिर प्रबंधन और स्थानीय धार्मिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अयोध्या में आयोजित एक बैठक के दौरान कई संतों ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि लंबे समय से स्थानीय साधु-संतों को राम मंदिर के प्रबंधन और धार्मिक गतिविधियों से दूर रखा गया है। संतों ने कहा कि अयोध्या की परंपरा और स्थानीय संत समाज की भूमिका को नजरअंदाज किया गया, जिससे असंतोष लगातार बढ़ता गया।
बैठक में मौजूद संतों ने दावा किया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना था कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
संतों ने कहा कि भगवान श्रीराम के नाम पर मिलने वाला चढ़ावा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। यदि किसी ने इस आस्था के साथ खिलवाड़ किया है तो उसे कानून के साथ-साथ धार्मिक और नैतिक दृष्टि से भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक में संत समाज ने सरकार से मांग की कि वर्तमान व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए। संतों ने प्रस्ताव पारित कर मांग की कि यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो वर्तमान ट्रस्ट की संरचना पर पुनर्विचार किया जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें स्थानीय संतों की प्रभावी भागीदारी और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित हो सके।
संतों का कहना था कि रामनगरी अयोध्या की धार्मिक परंपरा और मर्यादा को बनाए रखने के लिए स्थानीय संतों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि मंदिर के संचालन और उससे जुड़े निर्णयों में स्थानीय संत समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।
संत समाज के इस सार्वजनिक विरोध और नए अभियान की घोषणा के बाद राम मंदिर के चढ़ावा विवाद ने नया राजनीतिक और धार्मिक आयाम हासिल कर लिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और सरकार की आगे की कार्रवाई इस पूरे विवाद को किस दिशा में ले जाती है।
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Updated on:
01 Jul 2026 04:34 pm
Published on:
01 Jul 2026 04:16 pm
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