
Dhirendra Shastri Big Statement: अयोध्याके राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। इस बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस पूरे प्रकरण पर बड़ा बयान देकर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि मामले में अभी पूरी सच्चाई सामने आना बाकी है।
बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर लोग धीरेंद्र शास्त्री से सवाल कर रहे थे कि जब वह लोगों की 'पर्ची' खोलकर उनके जीवन से जुड़े राज बताते हैं, तो राम मंदिर चढ़ावा विवाद में शामिल लोगों के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं करते। इसी सवाल का जवाब देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हर विषय पर सार्वजनिक रूप से बोलना संभव नहीं होता और कुछ मामलों में परिस्थितियां अलग होती हैं।
विदेश दौरे के दौरान इंडोनेशिया में कथा करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि इस मामले में अब तक केवल छोटे स्तर के लोग ही कानून की गिरफ्त में आए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यहां का कानून मकड़ी के जाले की तरह है, जिसमें छोटी मछलियां फंस जाती हैं, जबकि बड़े मगरमच्छ निकल जाते हैं। उनका कहना था कि इस पूरे प्रकरण में अभी कई पहलुओं की जांच बाकी है।
धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी दावा किया कि वह इस पूरे मामले से जुड़े कुछ लोगों को अच्छी तरह जानते हैं। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि यदि वह सार्वजनिक रूप से बड़े नामों का खुलासा करेंगे तो उनकी अपनी सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा, '' अगर पर्ची खोल दूंगा तो ये लोग मुझे निपटा देंगे।'' हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया और न ही किसी व्यक्ति का नाम बताया।
इधर अयोध्या में स्थानीय साधु-संतों ने भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज कराया है। संत समाज ने एकजुट होकर "चंपत भगाओ, अयोध्या बचाओ" अभियान चलाने का ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद राम मंदिर प्रबंधन और धार्मिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अयोध्या में हुई एक बैठक के दौरान कई संतों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से स्थानीय साधु-संतों को राम मंदिर के प्रबंधन और धार्मिक गतिविधियों से दूर रखा जा रहा है। उनका कहना है कि अयोध्या की धार्मिक परंपरा और स्थानीय संत समाज की भूमिका को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया, जिससे असंतोष लगातार बढ़ा है।
संत समाज ने सरकार से मांग की है कि चढ़ावे से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एक ओर जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी ओर धीरेंद्र शास्त्री के बयान और स्थानीय संतों के विरोध ने इस मामले को नया आयाम दे दिया है। अब सभी की नजर जांच के निष्कर्षों और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।