
राम मंदिर दान विवाद अपडेट। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज
Ayodhya Ram Mandir Donation Dispute Update:अयोध्याके राम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावा चोरी के मामले में अब विवाद और गहराता नजर आ रहा है। एक ओर पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी कर नकदी, जेवरात और जमीन से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं, वहीं दूसरी ओर इस प्रकरण ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में भी नई बहस छेड़ दी है।
एक निजी चैनल से बातचीत में धर्म सेना प्रमुख और पूर्व कारसेवक संतोष दुबे ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राय पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जिनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
संतोष दुबे ने तीनों पदाधिकारियों को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके खिलाफ पुलिस को नामजद तहरीर दी गई है। उन्होंने मांग की, '' चंपत राय का नार्को टेस्ट होना चाहिए, ट्रस्ट में चारों शंकराचार्य को होना चाहिए ताकि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो सके।''
पूर्व कारसेवक ने आरोप लगाया कि चंपत राय पहले भी मंदिर से जुड़े मामलों में विवादों में रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर से जुड़ी जमीनों को लेकर पहले भी गंभीर अनियमितताएं हुई थीं। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक दस्तावेज या प्रमाण पेश नहीं किया।
संतोष दुबे ने कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है। उनका दावा है कि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं।
संतोष दुबे ने अयोध्या के कुछ साधु-संतों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने धार्मिक मर्यादाओं से हटकर आचरण अपनाया है। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं लिया।
धर्म सेना प्रमुख ने मांग की कि वर्तमान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए। उनकी मांग है कि मंदिर के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी देश के चारों शंकराचार्यों को सौंपी जाए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।
संतोष दुबे ने कहा कि वह पूरे मामले को लेकर राष्ट्रपति को पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपेंगे। उनका कहना है कि ज्ञापन में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई, सुरक्षा की मांग और मंदिर प्रबंधन में व्यापक बदलाव जैसे मुद्दे शामिल होंगे।
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Updated on:
29 Jun 2026 11:58 am
Published on:
29 Jun 2026 11:18 am
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