
Ram Mandir Trust Champat Rai Controversy:अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। इस बीच विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव सुरेन्द्र कुमार जैन ने एक न्यूज़ एजेंसी को दिए गए बयान में विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है। जबकि उन पर सवाल उठाने वालों को पहले अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन का आकलन करना चाहिए।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल चंपत राय के इस्तीफे को लेकर जारी बहस के बीच विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव सुरेन्द्र कुमार जैन ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने अपनी स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है और नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए यह कदम उठाया है।
सुरेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि जो लोग चंपत राय पर उंगली उठा रहे हैं। या उन पर लांछन लगाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इन नेताओं का खुद का ट्रैक रिकॉर्ड क्या रहा है। और उन पर कितने आरोप लग चुके हैं। यह भी जनता जानती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि चंपत राय का इस्तीफा अभी केवल ट्रस्ट को सौंपा गया है। इसे औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है। ट्रस्ट ही आगे यह तय करेगा कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट जिस व्यक्ति को यह जिम्मेदारी देगा। उस पर सभी को पूरा भरोसा होगा।
इस दौरान सुरेन्द्र कुमार जैन ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की सरकार ने आतंकवादियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का प्रयास किया था। हालांकि न्यायपालिका के हस्तक्षेप के बाद वे मामले दोबारा बहाल हो सके। उन्होंने कहा, “ऐसा व्यक्ति भगवान रामऔर अयोध्या के प्रति श्रद्धा की बात कैसे कर सकता है? क्या वे कभी रामलला के दर्शन करने गए हैं? यदि उनके मन में सच्ची आस्था होती। तो वे निश्चित रूप से भगवान राम के दर्शन करने जाते।
VHP नेता ने विपक्षी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास चंपत राय के खिलाफ कोई ठोस आरोप हैं। तो वे संजय सिंह की तरह विशेष जांच दल (SIT) या पुलिस प्रशासन को बुलाकर सबूत पेश करें। केवल राजनीतिक बयानबाजी और आरोप लगाने से सत्य नहीं बदलता। चंपत राय के इस्तीफे को लेकर अब सभी की नजर राम मंदिर ट्रस्ट के अगले फैसले पर टिकी हुई है। जबकि इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है।