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अयोध्या चढ़ावा चोरी मामला: एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट राम जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपी, आगे की कार्रवाई का रास्ता खुला

Ayodhya Ram Mandir: योध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में यूपी सरकार ने एसआईटी जांच पूरी कर रिपोर्ट राम जन्मभूमि ट्रस्ट को भेजी। जानें एफआईआर, आरोपियों और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी से जुड़ी पूरी अपडेट।
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ram mandir donation dispute row when will name of new ceo announced

राम मंदिर के CEO को लेकर बड़ी खबर! (photo- x@ShriRamTeerth)

Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर दान में कथित हेराफेरी के मामले में उत्तर प्रदेश गृह विभाग ने एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। रिपोर्ट के साथ आगे की जरूरी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। यह रिपोर्ट उस एसआईटी की ओर से तैयार की गई थी, जिसका गठन सुप्रीम कोर्ट के इस प्रकरण में हस्तक्षेप से पहले हो चुका था। और अब इसे शासन स्तर पर आगे बढ़ाया गया है।

13 जून को हुआ था एसआईटी का गठन

गौरतलब है कि यह एसआईटी 13 जून को ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार की ओर से गठित की गई थी। तीन सदस्यीय इस टीम की अगुआई लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने की, जबकि आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार को इसका सदस्य बनाया गया था। जांच शुरू होने के करीब दस दिन बाद, 23 जून को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपी थी, जिसमें कई सख्त संस्तुतियां शामिल थीं।

प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुई पहली एफआईआर

इसी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को श्रीराम जन्मभूमि थाने में इस प्रकरण की पहली प्राथमिकी दर्ज कराई गई। ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर दर्ज कराई गई इस एफआईआर (अपराध संख्या 90/2026) में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्रीराम शंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया, वहीं कुछ अन्य व्यक्तियों को अज्ञात अभियुक्त के तौर पर शामिल किया गया। शिकायत के अनुसार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है पूरा मामला

इस पूरे विवाद की जड़ में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली राशि में कथित हेराफेरी और मंदिर प्रबंधन से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान जांच में जुटी एसआईटी को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

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