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Ram Mandir Donation Dispute Row: चढ़ावा चोरी केस में SIT का एक्शन पूरा! रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम नहीं

Ram Mandir Donation Dispute Row: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही SIT ने फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का नाम नहीं है, जबकि मामले के आठ आरोपी पहले से जेल में हैं।
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा अपडेट। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Ram Mandir Donation Dispute Row Ayodhya: अयोध्याके राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का नाम नहीं है। मामले में नामजद किए गए 8 आरोपी पहले ही जेल में हैं।

गृह विभाग ने ट्रस्ट अध्यक्ष को सौंपी रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने SIT की रिपोर्ट राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंप दी है। अब इस रिपोर्ट को राम मंदिर ट्रस्ट की 2 सितंबर को प्रस्तावित बैठक में रखा जाएगा। राम मंदिर ट्रस्ट ने ही उत्तर प्रदेश सरकार से चढ़ावा चोरी मामले की SIT जांच कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया।

13 जून को बनी थी पहली SIT

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। इसमें IG रेंज किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को सदस्य बनाया गया था। इस SIT ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई हुई और आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी नई SIT

चढ़ावा चोरी मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इसके बाद शीर्ष अदालत ने SIT की जांच व्यवस्था में बदलाव के निर्देश दिए। कोर्ट ने जांच की कमान पुलिस अधिकारियों को सौंपने और फाइनेंस एक्सपर्ट को शामिल करने की बात कही थी। इसके बाद 20 जुलाई को नई SIT का गठन किया गया। इसमें लखनऊ रेंज के IG किरण एस, DIG अयोध्या सोमेन वर्मा और अयोध्या के SSP गौरव ग्रोवर को शामिल किया गया।

7 जून को पहली बार सामने आया था मामला

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार की SIT ने 23 जून को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। इसमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत आठ लोगों को नामजद किया गया। FIR में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा समेत ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं थे।

FIR दर्ज होने के कुछ घंटे बाद ही पुलिस ने टिन्नू समेत सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपी फिलहाल फैजाबाद जेल में हैं। इन पर चढ़ावे की गिनती के दौरान नोटों और गहनों की कथित चोरी का आरोप है।

प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा

SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे। इसके अलावा गोपाल नागरकट्टे को स्पेशल इनवाइटी की सूची से भी हटा दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी SIT बनाने का निर्देश क्यों दिया?

चढ़ावा चोरी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चार अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में मामले की जांच CBI को सौंपने के साथ-साथ मंदिर में दान के प्रबंधन से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग भी की गई है। पुरानी SIT राज्य सरकार के स्तर पर अपनी रिपोर्ट दे रही थी, जबकि नई SIT को सुप्रीम कोर्ट में समय-समय पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी है। मामले की जांच की निगरानी भी शीर्ष अदालत कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि आपराधिक जांच और चोरी से जुड़े मामलों की तकनीकी जांच में पुलिस अधिकारियों की भूमिका अधिक सीधी और प्रभावी होती है। इसी वजह से DIG और SSP स्तर के अधिकारियों को SIT में शामिल किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट मांगी

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि उन्हें भी जांच से जुड़ी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अदालत की सहायता कर सकें। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि जांच रिपोर्ट ऐसे लोगों को नहीं दी जा सकती, जो मामले से सीधे तौर पर जुड़े नहीं हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि वे मामले से अजनबी नहीं हैं और जनता की ओर से याचिका दाखिल की गई है।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SIT का गठन अदालत के निर्देश पर हुआ है और वह अदालत के प्रति जवाबदेह है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि फॉरेंसिक ऑडिटर वाली SIT अपनी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल करे। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट पहले वह खुद देखेगी और इसके बाद तय किया जाएगा कि उसे मामले से जुड़े सभी पक्षों को उपलब्ध कराया जाए या नहीं।

अब 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक में रखी जाएगी रिपोर्ट

SIT की फाइनल रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के गृह विभाग के जरिए राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंप दी गई है। अब इस रिपोर्ट को 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में रखा जाना है। मामले में पहले से गिरफ्तार आठ आरोपी जेल में हैं, जबकि चढ़ावा चोरी से जुड़े पूरे प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी भी बनी हुई है।

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