अयोध्या

राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों पर सियासत तेज, जानिए अखिलेश यादव के आरोप और चंपत राय का पलटवार

Akhilesh Yadav V/s Champat Rai: अयोध्या के राम मंदिर में आए चढ़ावे को लेकर इस समय एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर चढ़ावे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।। आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है।

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Jun 08, 2026
राम मंदिर ट्रस्ट पर लगाए गए आरोपों को लेकर चंपत राय के समर्थन में उतरे कार्यकर्ता, अखिलेश यादव पर साधा निशाना (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
राम मंदिर ट्रस्ट पर लगाए गए आरोपों को लेकर चंपत राय के समर्थन में उतरे कार्यकर्ता, अखिलेश यादव पर साधा निशाना (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

Akhilesh Yadav Controversy Statement: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में आए चढ़ावे को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि मामले पर सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और अदालत को स्वतः संज्ञान लेकर जांच करानी चाहिए।

अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है। ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफ़ाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है। न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है। सरकार की चुप्पी संदिग्ध है।

ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने दी सफाई

इन आरोपों पर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने सफाई देते हुए कहा कि ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है। उन्होंने कहा किश्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अपने विभिन्न कार्यों का ऑडिट समय-समय पर करता रहता है। हुंडी काउंटिंग कमरे का ऑडिट भी होता है।हुंडी काउंटिंग कमरे का ऑडिट राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी, कार्यकर्ता और स्टेट बैंक के कर्मचारी मिलकर करते हैं। यह कार्य कई दिनों तक चलता है। यही कार्य आजकल भी हो रहा है। कोई भी उल्लेखनीय बात किसी के भी ध्यान में अभी तक नहीं आई है।

ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय समर्थन में उतरे लोग

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय को लेकर हाल के दिनों में उठे राजनीतिक विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी और ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठाए गए सवालों के बाद अब चंपत राय के समर्थन में बड़ी संख्या में सामाजिक और धार्मिक कार्यकर्ता सामने आए हैं। समर्थकों का कहना है कि चंपत राय का पूरा सार्वजनिक जीवन सादगी, त्याग और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा है तथा उन पर लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक प्रेरित हैं।

अखिलेश यादव को झूठे बयान देने की आदत पड़ गई है: इंद्रेश कुमार

राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा कि अखिलेश यादव को झूठे बयान देने और बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत पड़ गई है। वह न तो अब तक कोई सबूत पेश कर पाए हैं और न ही आगे कर पाएंगे।"

उन्होंने कहा, "दुनिया में कुछ ऐसी ताकतें हैं जो भारत के प्रति दुर्भावना रखती हैं। इसी तरह देश के भीतर भी कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें भारत का शिक्षित, प्रगतिशील और सौहार्दपूर्ण राष्ट्र बनना पसंद नहीं है। मैं भगवान राम से प्रार्थना करता हूं कि वे अखिलेश यादव को सद्बुद्धि प्रदान करें।"

सपा नेता तेज नारायण पांडेय बोले - यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण

उधर, समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण पांडेय ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पिछले दो-तीन दिनों से अयोध्या में यह चर्चा चल रही है कि दानपात्र में श्रद्धालुओं द्वारा डाले गए धन के साथ विश्वासघात हुआ है।"

उन्होंने कहा, "ट्रस्ट की कार्यप्रणाली शुरू से ही सवालों के घेरे में रही है। चाहे जमीन घोटाले से जुड़े आरोप हों या अब दानपात्र में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का मामला। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस संबंध में जो ट्वीट किया है, मैं उससे पूरी तरह सहमत हूं। कई मीडिया संस्थानों और पत्रकारों ने भी इस मुद्दे पर रिपोर्ट प्रकाशित की हैं।" तेज नारायण पांडेय ने कहा कि श्रद्धालु भगवान राम के प्रति अपनी आस्था के चलते दान करते हैं, इसलिए इस तरह के आरोप सामने आना गंभीर विषय है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।