
Nripendra Mishra in Ayodhya: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर आस्था, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के संदेश की साक्षी बनी। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भगवान श्रीराम के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि वे भगवान राम से प्रार्थना करते हैं कि वे देश को निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर करें और प्रत्येक नागरिक के जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का संचार करें। उन्होंने कहा कि भगवान राम केवल एक धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे सत्य, मर्यादा, कर्तव्य, न्याय और सद्गुणों के सर्वोच्च प्रतीक हैं, जिनके आदर्श आज भी समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन मानवता को यह सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य, धर्म और मर्यादा का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अपने जीवन के प्रत्येक चरण में आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श मित्र और आदर्श राजा का स्वरूप प्रस्तुत किया। यही कारण है कि उनका जीवन केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक भारतीय के जीवन और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के आदर्शों को अपनाकर ही समाज में समरसता, भाईचारा और नैतिक मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है।
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष ने कहा कि वे भगवान राम से यही प्रार्थना करते हैं कि भारत निरंतर विकास के नए आयाम स्थापित करे और देश का प्रत्येक नागरिक सुखी, स्वस्थ और सुरक्षित जीवन व्यतीत करे। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके नागरिकों की खुशहाली, नैतिकता और सामाजिक एकता में निहित होती है। यदि समाज भगवान राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारे, तो देश विकास के साथ-साथ नैतिक मूल्यों में भी विश्व के लिए उदाहरण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व मंच पर अपनी नई पहचान बना रहा है और यह समय सांस्कृतिक विरासत के साथ आधुनिक विकास को जोड़ने का है। भगवान राम के आदर्श इस दिशा में समाज को सही मार्ग दिखाने का कार्य करते हैं।
नृपेंद्र मिश्रा ने अपने वक्तव्य में सनातन धर्म के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि जो लोग सनातन धर्म को मानते हैं, उनके लिए भगवान राम केवल पूजनीय देवता नहीं बल्कि जीवन के पथप्रदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि हम जहां भी रहें, जिस भी परिस्थिति में रहें, भगवान राम का स्मरण हमें सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन जीवन के हर संघर्ष में शक्ति प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि भगवान राम के प्रति समर्पण केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके आदर्शों को व्यवहार में उतारना ही सच्ची श्रद्धा है। सत्य, सेवा, त्याग, करुणा और कर्तव्यपरायणता जैसे गुण समाज को मजबूत बनाते हैं और यही श्रीराम का संदेश भी है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में निर्मित हो रहा भव्य श्रीराम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, ऐतिहासिक विरासत और करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। मंदिर निर्माण का कार्य निरंतर प्रगति पर है और देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर भगवान श्रीराम के दर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और राष्ट्र की गौरवशाली विरासत से जोड़ने का कार्य करेगा। यह मंदिर केवल पत्थरों से बनी एक भव्य संरचना नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और वर्षों की तपस्या का जीवंत प्रतीक है।
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि भगवान राम का जीवन और रामराज्य की अवधारणा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी हजारों वर्ष पहले थी। रामराज्य का अर्थ केवल एक आदर्श शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि ऐसा समाज है जहां न्याय, समानता, करुणा और जनकल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता हो। उन्होंने कहा कि यदि समाज और शासन दोनों भगवान राम के आदर्शों का अनुसरण करें, तो देश में सामाजिक सौहार्द, विकास और समृद्धि का नया अध्याय लिखा जा सकता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान श्रीराम की कृपा से भारत निरंतर प्रगति करेगा और विश्व में अपनी सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाएगा। उन्होंने अंत में भगवान श्रीराम से देशवासियों के सुख, शांति, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि हम सभी का कर्तव्य है कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।