
Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी का मामला अब सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है। जैसे-जैसे विशेष जांच दल (SIT) और पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे हो रहे हैं। दूसरी ओर, मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सिस्टम में भी बड़े बदलाव शुरू हो गए हैं। पुराने पहचान पत्र (आईडी कार्ड) रद्द किए जा रहे हैं, कर्मचारियों से लगातार पूछताछ हो रही है और कई लोग नौकरी जाने के डर से सहमे हुए हैं।
मामले के मुख्य आरोपित रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष यादव को पुलिस ने कस्टडी रिमांड पर लेकर कई घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में टिन्नू खुद को बेगुनाह बताता रहा, लेकिन जब पुलिस ने पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों के बयानों के आधार पर सवाल पूछे तो उसने कई अहम जानकारियां दीं। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान उसने कुछ ऐसे लोगों के नाम भी बताए हैं, जिनकी भूमिका की अब जांच की जा रही है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि दानपात्रों की चाबियां उसके पास कैसे पहुंचती थीं और इस पूरी व्यवस्था की जानकारी किन-किन लोगों को थी।
जांच एजेंसियां अब टिन्नू यादव की पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड कंस्ट्रक्शन कंपनी और परिवार के नाम खरीदी गई संपत्तियों की भी जांच कर रही हैं। पुलिस वित्तीय लेन-देन और आय के स्रोतों की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित विभागों से रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।
इस पूरे मामले का असर अब राम मंदिर के कर्मचारियों और सेवादारों पर भी दिखाई देने लगा है। मंदिर परिसर में दान गिनने, यात्री सेवा केंद्र, लेखा विभाग, सुरक्षा, सफाई और दर्शन व्यवस्था से जुड़े कई कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कुछ लोगों को आशंका है कि जांच का दायरा और बढ़ सकता है। यही वजह है कि बिना मानदेय सेवा देने वाले कई सेवादारों ने फिलहाल मंदिर आना बंद कर दिया है, जबकि कुछ कर्मचारी नौकरी जाने की आशंका के बीच काम कर रहे हैं।
मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पूर्व महासचिव चंपत राय के कार्यकाल में जारी किए गए पुराने आईडी कार्ड अब मान्य नहीं माने जा रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई इंजीनियर, तकनीकी कर्मचारी और निर्माण एजेंसियों के अधिकारी मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनके नए आईडी कार्ड अभी जारी नहीं हुए हैं। इसका असर मंदिर परिसर में चल रहे कई निर्माण कार्यों पर भी पड़ रहा है। बाउंड्री वॉल, संग्रहालय, ट्रस्ट कार्यालय, विश्राम गृह और अन्य परियोजनाओं पर काम कर रही एजेंसियों के कर्मचारियों को प्रवेश द्वार से वापस लौटना पड़ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दानपात्रों की निगरानी और नकदी की गिनती के दौरान सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया जा रहा था। भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ और जुटाए जा रहे सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगर जांच में नए नाम सामने आते हैं तो उन्हें भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। वहीं, मंदिर प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था और दान प्रबंधन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रहा है।