
निर्मोही अखाड़े की याचिका का परमहंस आचार्य ने किया समर्थन। फोटो सोर्स-IANS
Ram Mandir Donation Dispute Row Ayodhya: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। निर्मोही अखाड़े ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए ट्रस्ट के कामकाज और वित्तीय व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। अखाड़े ने ट्रस्ट के आय-व्यय का फॉरेंसिक ऑडिट कराने, ट्रस्ट के पुनर्गठन और रामानंदी परंपरा के अनुरूप पूजा-पाठ व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
इधर, तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी इस याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि अगर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रस्ट से जुड़े किसी भी फैसले में संत समाज और करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। परमहंस आचार्य ने कहा कि अगर ट्रस्ट में बदलाव या नए सदस्यों को शामिल करने की प्रक्रिया होती है तो इसमें ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिनकी आस्था और पृष्ठभूमि सनातन परंपरा से जुड़ी हो।
निर्मोही अखाड़े ने अपनी याचिका में ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था की स्वतंत्र फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही ट्रस्ट को सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में पुनर्गठित करने और रामानंदी परंपरा के अनुसार मंदिर की पूजा-पद्धति बहाल करने की भी अपील की गई है।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने किया था। ऐसे में अगर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली या वित्तीय लेन-देन को लेकर कोई सवाल उठे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना स्वाभाविक और आवश्यक है। हालांकि, उन्होंने कहा कि किसी भी बदलाव के दौरान सनातन परंपरा और संत समाज की भावनाओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
परमहंस आचार्य ने कहा कि अगर भविष्य में ट्रस्ट का पुनर्गठन होता है या नए सदस्यों की नियुक्ति की जाती है, तो ऐसे लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जिनकी आस्था सनातन परंपरा में हो। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में शामिल किए जाने वाले व्यक्तियों की सामाजिक, धार्मिक और वैचारिक पृष्ठभूमि की भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
परमहंस आचार्य ने दावा किया कि अयोध्या का संत समाज चाहता है कि ट्रस्ट में ऐसे किसी भी व्यक्ति को शामिल न किया जाए, जिसका संबंध इंडिया गठबंधन से रहा हो। उनका आरोप है कि कुछ राजनीतिक दल समय-समय पर सनातन परंपराओं को निशाना बनाते रहे हैं, इसलिए ट्रस्ट की संरचना में ऐसे लोगों को स्थान नहीं मिलना चाहिए।
परमहंस आचार्य ने कहा कि निर्मोही अखाड़े की ओर से उठाए गए सवालों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए ट्रस्ट से जुड़े हर निर्णय में पारदर्शिता, जवाबदेही और धार्मिक परंपराओं का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने ट्रस्टियों के चयन में योग्यता, धार्मिक आस्था और पृष्ठभूमि को प्राथमिक आधार बनाने की बात कही।
Updated on:
19 Jul 2026 02:01 pm
Published on:
19 Jul 2026 02:00 pm
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