
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। असली जिम्मेदारों तक जांच नहीं पहुंच रही।
राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज पहली एफआईआर के बाद आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन विपक्ष लगातार इस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रामलला के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि अब तक हुई कार्रवाई केवल दिखावटी प्रतीत होती है। उनका आरोप था कि जांच का दायरा सीमित रखा गया है। बड़े स्तर पर जिम्मेदारी तय करने से बचने की कोशिश की जा रही है। उधर, जांच एजेंसियां मामले को आगे बढ़ाने में जुटी हैं। सूत्रों के मुताबिक SIT जल्द ही कुछ और अहम कदम उठा सकती है। वहीं पुलिस गिरफ्तार किए गए। आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी कर रही है। ताकि कथित गड़बड़ी की पूरी श्रृंखला और उससे जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाया जा सके।
इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर रामजन्मभूमि थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर में एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी समेत कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि चढ़ावे की गणना और रिकॉर्डिंग प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला चर्चा के केंद्र में है। केजरीवाल का अयोध्या दौरा ऐसे समय पर हुआ है। जब चढ़ावा विवाद को लेकर लगातार बयानबाजी जारी है। ऐसे में उनके बयान को आगामी राजनीतिक रणनीति और मंदिर से जुड़े विवाद पर विपक्ष के रुख के रूप में भी देखा जा रहा है।
अब सबकी नजर SIT की अगली कार्रवाई और पुलिस पूछताछ पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित रहती है। या फिर इसके दायरे में अन्य नाम भी शामिल किए जाते हैं।