अयोध्या

Ram Mandir Donation Dispute Row: पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने किया राम मंदिर CEO पद के लिए आवेदन

Ram Mandir Donation Dispute Row Ayodhya: राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए आवेदन कर पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।
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Jul 15, 2026
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पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर। (फाइल फोटो: IANS)

Ram Mandir Donation Dispute Row Ayodhya: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही पहला आवेदन उत्तर प्रदेशकैडर के पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर (Amitabh Thakur) की ओर से पहुंचा है। ट्रस्ट ने हाल ही में इस पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं और आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 18 जुलाई निर्धारित की गई है।

अमिताभ ठाकुर का कहना है कि ट्रस्ट द्वारा तय की गई सभी पात्रताओं और अनुभव संबंधी शर्तों को वह पूरा करते हैं। उनके मुताबिक, लंबे प्रशासनिक अनुभव के चलते वह इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को निभाने में सक्षम हैं।

CEO पद के लिए क्यों पेश की दावेदारी?

अमिताभ ठाकुर ने आवेदन भेजने के बाद कहा कि ट्रस्ट ने जिस तरह की योग्यता, अनुभव और प्रशासनिक क्षमता की अपेक्षा की है, वह उन सभी मानकों पर खरे उतरते हैं। उनका मानना है कि सालों तक पुलिस और प्रशासनिक सेवा में काम करने का अनुभव इस पद की जिम्मेदारियों को निभाने में मददगार साबित होगा।

बता दें कि ट्रस्ट ने चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद सीईओ रखने का फैसला किया है। ऐसे में इस पद के लिए आवेदन करने के बाद एक बार फिर अमिताभ ठाकुर सुर्खियों में हैं। वह अलग-अलग कारणों से अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं।

मुलायम सिंह यादव के फोन कॉल का ऑडियो सार्वजनिक किया

साल 2015 में अमिताभ ठाकुर ने आरोप लगाया कि तत्कालीन समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने उन्हें फोन कर धमकाया और "सुधर जाने" की सलाह दी। अमिताभ ठाकुर ने इस बातचीत की रिकॉर्डिंग सार्वजनिक कर दी, जिससे बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

बाद में उन्होंने इस मामले में हजरतगंज थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया था। मुलायम सिंह यादव ने फोन करने की बात स्वीकार की थी, लेकिन धमकी देने के आरोप से इनकार किया था।

फेसबुक के खिलाफ दर्ज कराई थी FIR

अमिताभ ठाकुर साहित्य और लेखन से भी जुड़े रहे हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले ठाकुर ने एक बार फेसबुक पर बने 'आई हेट गांधी' नाम के पेज का विरोध किया था। उन्होंने पहले फेसबुक से उस पेज को हटाने की मांग की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर फेसबुक के खिलाफ FIR दर्ज करा दी। इसके बाद संबंधित पेज हटा दिया गया। इस कदम की सोशल मीडिया पर काफी सराहना भी हुई थी।

धोनी को भेजा था 1000 रुपये का चेक

साल 2015 के क्रिकेट विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की हार के बाद अमिताभ ठाकुर ने तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को 1000 रुपये का चेक भेजा था। इसके साथ उन्होंने एक पत्र भी लिखा था, जिसमें हार के लिए व्यंग्यात्मक अंदाज में धन्यवाद दिया गया था।

अमिताभ ठाकुर फिल्मी गीत 'मुन्नी बदनाम हुई' और 'शीला की जवानी' जैसे गानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का भी रुख कर चुके हैं।

विकास दुबे के एनकाउंटर से पहले कर दी थी इसकी चर्चा

साल 2020 में कानपुर के बिकरू गांव में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद गैंगस्टर विकास दुबे ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में सरेंडर किया था। सरेंडर के तुरंत बाद अमिताभ ठाकुर ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि संभव है विकास दुबे पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश करते हुए मारा जाए और मामला वहीं समाप्त हो जाए।

उन्होंने उस समय यह भी कहा था कि असली जरूरत विकास दुबे से ज्यादा पुलिस व्यवस्था के भीतर मौजूद कमियों और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच करने की है। बाद में विकास दुबे पुलिस एनकाउंटर में मारा गया, जिसके बाद उनका यह पोस्ट काफी चर्चा में रहा था।

ट्रस्ट के CEO बने तो क्या करना होगा?

बता दें कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, नियुक्त होने वाला CEO सीधे ट्रस्ट के महासचिव के प्रति जवाबदेह रहेगा। मंदिर से जुड़े प्रशासनिक, वैधानिक और वित्तीय कार्यों की जिम्मेदारी उसी के पास होगी। इसके अलावा महासचिव द्वारा समय-समय पर सौंपे गए अन्य दायित्वों का निर्वहन भी CEO को करना होगा।

CEO पद के लिए धार्मिक पात्रता भी अनिवार्य

ट्रस्ट ने इस पद के लिए धार्मिक पात्रता भी तय की है। आवेदन करने वाला व्यक्ति हिंदू, वैष्णव और भगवान श्रीराम का भक्त होना चाहिए। अगर किसी उम्मीदवार को मंदिर प्रबंधन का पूर्व अनुभव है तो उसे चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी।

दान विवाद के बाद बढ़ी CEO पद की अहमियत

राम मंदिर चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने में जुटा है। ऐसे में नए CEO की नियुक्ति को बेहद अहम माना जा रहा है। नए अधिकारी से प्रशासनिक पारदर्शिता, वित्तीय निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने की उम्मीद की जा रही है।