अयोध्या

राम मंदिर चढ़ावा केस: 8 आरोपी 10 अगस्त तक जेल में, अब SIT में फॉरेंसिक ऑडिट से होगी पैसों की पड़ताल

Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 8 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 10 अगस्त तक बढ़ी। अब SIT में CA और फॉरेंसिक ऑडिटर की एंट्री के बाद जांच का दायरा बढ़ेगा।
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Jul 28, 2026
Ram Mandir Donation Theft, Ayodhya Ram Mandir,
8 आरोपी 10 अगस्त तक जेल में

Ram Mandir Donation Theft:अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी का मामला अब केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह गया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से विशेष जांच दल (SIT) में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने के निर्देश के बाद जांच का दायरा काफी व्यापक माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अब मंदिर के वित्तीय लेनदेन, निर्माण से जुड़े खर्च और ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था की भी गहराई से पड़ताल की जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार, नई एसआईटी मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी समेत उन सभी लोगों से पूछताछ कर सकती है, जिनकी जिम्मेदारी वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक नोटिस जारी नहीं किया गया है।

अब सिर्फ चोरी नहीं, पूरे वित्तीय सिस्टम की होगी पड़ताल

अब तक पुलिस की जांच मुख्य रूप से आठ गिरफ्तार कर्मचारियों और कथित चोरी तक सीमित थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद जांच का दायरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख सकती हैं कि मंदिर ट्रस्ट के गठन के बाद चढ़ावे और अन्य स्रोतों से कितनी धनराशि प्राप्त हुई, उसका उपयोग किन मदों में किया गया और सभी वित्तीय रिकॉर्ड निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हैं या नहीं।बताया जा रहा है कि फॉरेंसिक ऑडिटर बैंक खातों, बैलेंस शीट, भुगतान रिकॉर्ड, कर्मचारियों के वेतन, लेनदेन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्टों का भी अध्ययन किया जा सकता है।

आठों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में

इस बीच, चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आठों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 10 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। सोमवार को सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया गया, जिसके बाद अदालत ने उनकी न्यायिक अभिरक्षा आगे बढ़ाने का आदेश दिया। इससे पहले पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है। जांच के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर तीन कारें, एक मोटरसाइकिल, नकदी और कुछ आभूषण बरामद किए गए थे। पुलिस ने घटनास्थल का सीन भी दोबारा तैयार कराया और आरोपियों से अलग-अलग स्थानों पर जाकर पूछताछ की।

ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड पर रहेगी विशेष नजर

सूत्रों का कहना है कि जांच टीम यह भी पता लगाएगी कि मंदिर के पक्ष में फैसला आने और ट्रस्ट बनने के बाद कितनी धनराशि प्राप्त हुई, उसका हिसाब-किताब किस तरह रखा गया और खर्च किस प्रक्रिया के तहत किया गया। कर्मचारियों की संख्या, वेतन भुगतान और अन्य वित्तीय दस्तावेज भी जांच का हिस्सा हो सकते हैं। जानकारों का मानना है कि नई एसआईटी बनने के बाद ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों, दोनों से आवश्यक दस्तावेजों के साथ पूछताछ की जा सकती है। ऐसे में जांच पूरी होने में अभी कुछ और समय लग सकता है।

पहली एसआईटी की रिपोर्ट के बाद हुई थीं गिरफ्तारियां

पहली एसआईटी की रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, रमाशंकर मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और मनीष यादव को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अदालत की अनुमति से सभी से पूछताछ की गई और बाद में पुलिस रिमांड पर भी लिया गया।

कुल चोरी गई रकम का पता लगाना अब भी चुनौती

जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब यह पता लगाना है कि मंदिर से कुल कितनी धनराशि कथित रूप से गायब हुई। इसके लिए पुलिस मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बैंकिंग गतिविधियों की जांच कर रही है। पूछताछ के दौरान कुछ आरोपियों द्वारा शेयर बाजार में निवेश और ब्याज पर धन देने जैसी बातें भी सामने आई थीं, जिनका सत्यापन किया जा रहा है।

आरोपी सुभाष को पेंशन निकालने की अंतरिम राहत

मामले के एक आरोपी सुभाष श्रीवास्तव को अदालत से आंशिक राहत मिली है। एंटी करप्शन कोर्ट ने उन्हें 26 जून के बाद उनके खाते में आई पेंशन राशि निकालने की अनुमति दी है। हालांकि, इससे पहले खाते में मौजूद धनराशि को लेकर अदालत ने अगली सुनवाई 30 जुलाई तय की है। सुभाष की ओर से दायर आवेदन में खाते को आंशिक रूप से संचालित करने की मांग की गई थी। विवेचक ने भी 25 जून के बाद जमा हुई पेंशन राशि पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी, जिसके बाद अदालत ने अंतरिम राहत प्रदान की।

30 हजार रुपये के लेनदेन पर अगली सुनवाई

बचाव पक्ष के अनुसार, सुभाष के बैंक खाते से निकाले गए 30 हजार रुपये को जांच में संदिग्ध माना गया है। उनका कहना है कि यह राशि हाईकोर्ट में चल रहे एक मुकदमे की वकील फीस देने के लिए निकाली गई थी, लेकिन अधिवक्ता से मुलाकात नहीं होने पर दोबारा खाते में जमा कर दी गई थी। बाद में जरूरत पड़ने पर फिर निकाली गई। इस संबंध में 30 जुलाई को अदालत के समक्ष विस्तृत पक्ष रखा जाएगा।

बचाव पक्ष उठाएगा कुल चोरी गई रकम का सवाल

बचाव पक्ष के अधिवक्ता का कहना है कि अगली सुनवाई में विवेचक से यह भी पूछा जाएगा कि अब तक की जांच के अनुसार मंदिर से कुल कितनी धनराशि कथित रूप से चोरी हुई है। उनका तर्क है कि जब तक कुल रकम स्पष्ट नहीं होगी, तब तक खातों को फ्रीज करने और बरामदगी की कार्रवाई का आधार भी स्पष्ट होना चाहिए।

Updated on:
28 Jul 2026 08:51 am
Published on:
28 Jul 2026 08:51 am
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