
Ram Mandir Donation Dispute Case Update Ayodhya: राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बुधवार को अयोध्या में अपनी सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक आयोजित करने जा रहा है। बैठक में मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने, पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति और ट्रस्ट में खाली पड़े 3 प्रमुख पदों को भरने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक CEO की नियुक्ति पर अंतिम फैसला अभी टल सकता है, क्योंकि चयन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट की ओर से गठित 3 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति को CEO पद के लिए देशभर से बड़ी संख्या में आवेदन मिले हैं। आवेदनों की स्क्रीनिंग का काम अभी जारी है, इसलिए बैठक से पहले अंतिम 3 उम्मीदवारों की सूची तैयार होना मुश्किल माना जा रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि राम मंदिर के पहले प्रोफेशनल CEO की नियुक्ति पर अंतिम मुहर फिलहाल नहीं लगेगी।
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद को लेकर देशभर में जबरदस्त रुचि देखने को मिली है। इस पद के लिए 5,500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। 3 सदस्यीय चयन समिति सभी आवेदनों की जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, यदि प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है तो 15 अगस्त के आसपास नए CEO के नाम की घोषणा की जा सकती है।
ट्रस्ट ने 6 जुलाई की बैठक में पहली बार CEO का पद सृजित करने का निर्णय लिया था। यह फैसला मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और पेशेवर बनाने के उद्देश्य से लिया गया। नियुक्ति के बाद CEO मंदिर के दैनिक संचालन, ट्रस्ट के फैसलों के क्रियान्वयन, कर्मचारियों की निगरानी, प्रशासनिक व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। ट्रस्ट की मंजूरी से CEO आवश्यक अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति भी कर सकेंगे।
CEO के अलावा ट्रस्ट में खाली पड़े तीन महत्वपूर्ण पदों को भरने पर भी चर्चा होने की संभावना है। इनमें एक पद अयोध्या के शाही परिवार के पूर्व प्रमुख एवं ट्रस्टी बिमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद खाली हुआ था। वहीं दो अन्य पद पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद रिक्त हुए।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के स्थायी महासचिव के रूप में कृष्ण मोहन का नाम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वहीं ट्रस्टी के रिक्त पदों के लिए भी कई नामों पर चर्चा जारी है। इनमें विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. बांगड़ा का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है।
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए सबसे पहला आवेदन उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने किया था। अमिताभ ठाकुर का कहना है कि ट्रस्ट द्वारा निर्धारित सभी पात्रताओं को वह पूरा करते हैं और अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के आधार पर खुद को इस जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त उम्मीदवार मानते हैं।
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद ट्रस्ट प्रशासनिक सुधारों की दिशा में लगातार कदम उठा रहा है। ट्रस्ट का उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और मंदिर के संचालन को अधिक पेशेवर बनाना है। इसी दिशा में CEO की नियुक्ति, प्रशासनिक ढांचे का पुनर्गठन और जवाबदेही बढ़ाने जैसे फैसलों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बुधवार को होने वाली ट्रस्ट बैठक को राम मंदिर के भविष्य के प्रशासनिक ढांचे के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक में लिए जाने वाले निर्णय न केवल मंदिर के संचालन की दिशा तय करेंगे, बल्कि हालिया विवादों के बाद ट्रस्ट की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी बड़ा संदेश देंगे।