
अयोध्या। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर जारी विवाद के बीच राम भक्तों की आस्था अडिग, श्रद्धालुओं की आमद लगातार जारी है। अयोध्या के संत समाज ने कहा कि चढ़ावे और श्रद्धालुओं की संख्या पर विवाद का कोई असर नहीं, भक्त लगातार राम मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। अयोध्या में राम भक्तों के साथ शिव भक्तों की भारी भीड़, सड़कों पर 'बोल बम' के जयकारे लग रहे हैं।
विजयानंद महाराज ने बताया कि निश्चित रूप से भक्तों का आना शुरू हो गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीराम के दर्शन के साथ सावन के पावन पर्व पर जलाभिषेक करने आ रहे हैं। शुक्ल पक्ष आने पर भीड़ में तेजी आएगी। चढ़ावा चोरी का मामला प्रभावी नहीं हो पाया है और दान दिए जाने का क्रम जारी है। रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने कहा कि श्रावण प्रतिवर्ष आता है, लेकिन इस साल श्रावण मास में सनातनी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। वहीं श्रद्धालु बड़ी मात्रा में चढ़ावा दे रहे हैं। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को बढ़ावा देकर कुछ असामाजिक तत्वों ने जनता और श्रद्धालुओं को भ्रमित करने की कोशिश की थी। इस मामले को धता बताते हुए सनातनी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे सनातन धर्म में दान का महत्व है। दान सनातन का अंग है। वह दिन दूर नहीं जब इस मंदिर को सोने-चांदी से जड़ा जाएगा। सत्येंद्र दास वेदांती ने बताया कि श्रावण मास का महीना चल रहा है। इस समय शिवभक्तों का सैलाब सरयू का तट हो या नागेश्वरनाथ का मंदिर हो, रामजन्म भूमि हो या हनुमानगढ़ी निरंतर बना हुआ है। इसी बीच श्रद्धालुओं में दानदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या दानपुण्य और धर्म की नगरी है। यहां श्रद्धालु आ रहे हैं और स्नान-ध्यान कर दान चढ़ा रहे हैं। श्रावण के पवित्र महीने में लोग दिल खोलकर दान करते हैं।
इससे पहले श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने कहा था कि वह जीवन के अंतिम समय तक अयोध्या में ही रहेंगे। उन्होंने साफ किया कि रामनगरी छोड़कर कहीं जाने का उनका कोई इरादा नहीं है। चंपत राय ने तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य से मुलाकात की थी। दोनों के बीच बंद कमरे में करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद परमहंस आचार्य ने बताया कि उन्होंने चंपत राय से अयोध्या में ही रहने का आग्रह किया था। परमहंस आचार्य के अनुसार, चंपत राय ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह अपना बाकी जीवन अयोध्या में ही बिताएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह रामनगरी को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।