
Shankaracharya Avimukteshwaranand Big Statement: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदसरस्वती ने अयोध्या प्रवास के दौरान गोरक्षा कानून को लेकर केंद्र सरकार और राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र होने के बावजूद आज तक गायों की रक्षा के लिए प्रभावी राष्ट्रीय कानून नहीं बन सका, जबकि आजादी से पहले ऐसा वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हिंदू समाज केवल उन राजनीतिक दलों का समर्थन करे, जो गोरक्षा के लिए स्पष्ट कानून बनाने की गारंटी दें।
शंकराचार्य ने कहा कि भारत में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है, लेकिन कानून की नजर में आज भी उसे सिर्फ एक जानवर माना जाता है। उनके अनुसार यह स्थिति सनातन समाज की भावनाओं के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राजनीतिक दल चुनाव के दौरान गाय के नाम पर समर्थन मांगते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद गोरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाते। उनका कहना था कि फोटो खिंचवाने और प्रतीकात्मक कार्यक्रमों से गोरक्षा नहीं होगी, बल्कि इसके लिए सख्त कानून की आवश्यकता है।
शंकराचार्य ने बताया कि उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए 6 से 8 महीने का समय दिया है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में यदि कोई दल गोरक्षा को लेकर ठोस पहल करता है तो जनता उसके बारे में विचार करेगी। उन्होंने कहा कि वे देशभर में गोरक्षा समर्थकों से संवाद करेंगे और लोगों से अपील करेंगे कि वे अपने मतदान का निर्णय इसी मुद्दे को ध्यान में रखकर करें।
उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति पूरी तरह वोट पर आधारित है, इसलिए मतदाताओं के पास सबसे बड़ा अधिकार है। उनका कहना था कि अब लोगों को केवल भावनात्मक नारों से नहीं, बल्कि गोरक्षा के लिए कानूनी गारंटी देने वाले दलों को समर्थन देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वे देशभर में लोगों को इस मुद्दे पर जागरूक करने का अभियान चलाएंगे।
शंकराचार्य ने कहा कि सत्ता में रहने वाली पार्टी से जनता की अपेक्षाएं सबसे ज्यादा होती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों से लोगों ने गोरक्षा की उम्मीद के साथ सरकार का समर्थन किया, लेकिन अब तक इस दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित कानून नहीं बन पाया। उन्होंने कहा कि जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि लंबे समय तक सरकार में रहने के बावजूद गोरक्षा के लिए व्यापक कानूनी व्यवस्था क्यों नहीं बन सकी।
अयोध्या में राम मंदिर के प्रबंधन और हाल के विवादों का उल्लेख करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि अगर व्यवस्था में खामियां हैं तो केवल कुछ लोगों को बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था को लेकर देश के कई सनातनी संतों और श्रद्धालुओं के मन में सवाल हैं। उनका कहना था कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान जो लोग सक्रिय नहीं थे, आज वही मंदिर की व्यवस्था संभाल रहे हैं।
अयोध्या में मंदिर से जुड़े मामलों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और राज्य सरकार की भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि जांच पूरी पारदर्शिता से होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच को लेकर जो आश्वासन दिए गए थे, उन पर अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दी। उनका कहना था कि मूल मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय नए विवाद सामने आने लगे हैं।
शंकराचार्य ने बताया कि वे इन दिनों अयोध्या में प्रवास पर हैं। इस दौरान वे साधु-संतों और गोरक्षा समर्थकों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य लोगों को गोरक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करना और इस विषय को जनआंदोलन का रूप देना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में गोरक्षा कानून और इससे जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में व्यापक संवाद चलाया जाएगा।