
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (photo- x@RamJanmbumi)
Ram Mandir Donation Theft Row Ayodhya:अयोध्याके राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब तक की सबसे बड़ी जांच में बदल चुका है। मंदिर में दान राशि की कथित हेराफेरी का खुलासा किसी बड़ी शिकायत या तकनीकी जांच से नहीं, बल्कि एक चौकीदार की सतर्कता और वॉशरूम में मिले 40 हजार रुपये से हुआ। इस घटना के बाद ट्रस्ट ने पहले आंतरिक जांच शुरू की और फिर मामला पुलिस तक पहुंचा। इसके बाद शुरू हुई कार्रवाई में कई स्थानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की गई।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मई के अंतिम सप्ताह में राम मंदिरपरिसर के एक गेटकीपर की नजर वॉशरूम में छिपाकर रखे गए 40 हजार रुपये के नोटों के बंडलों पर पड़ी। उसने तुरंत इसकी जानकारी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक ट्रस्टी को दी। सूचना मिलते ही ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी मंदिर पहुंचे और सुरक्षा अधिकारियों समेत अन्य ट्रस्ट सदस्यों को मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद पहली बार यह आशंका गहराई कि मंदिर की दान राशि में हेराफेरी की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट ने पहले अपने स्तर पर प्रारंभिक जांच शुरू की। इसके बाद 4 जून को जिला प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी दी गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दान गणना केंद्र से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की और कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।
बताया जा रहा है कि शुरुआती दौर में संदिग्ध कर्मचारियों से ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने कई जिलों में एक साथ छापेमारी शुरू की।
शिकायत दर्ज होने के महज 17 घंटे के भीतर पुलिस टीमों ने ट्रस्ट प्रतिनिधियों के साथ मिलकर अयोध्या और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद किए। तलाशी अभियान बहराइच के नानपारा, प्रतापगढ़ के कुंडा और अन्य स्थानों पर चलाया गया। पुलिस ने आरोपी रामाशंकर मिश्रा के नानपारा स्थित घर और एक अन्य आरोपी अविनाश शुक्ला के प्रतापगढ़ स्थित पैतृक आवास की भी तलाशी ली।
जांच के दौरान आरोपी अनुकल्प मिश्रा, उनके रिश्तेदार लवकुश मिश्रा और अयोध्या के नाका क्षेत्र निवासी करुणेश की निशानदेही पर कथित रूप से चोरी की गई अतिरिक्त नकदी और जेवर भी बरामद किए गए। पुलिस का कहना है कि इन खुलासों से उन स्थानों तक पहुंचने में मदद मिली, जहां दान राशि को छिपाकर रखा गया था।
सूत्रों के अनुसार, शुरुआती रिकवरी अभियान ट्रस्ट के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और जिला पुलिस अधिकारियों की संयुक्त निगरानी में चलाया गया। उस समय ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी गोपाल राव, अनिल मिश्रा और अयोध्या पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
जांच में सामने आया है कि चोरी की जानकारी मिलने के तुरंत बाद चंपत राय के निर्देश पर ट्रस्ट ने 21 सदस्यीय टीम गठित की थी। इस टीम ने दान गणना केंद्र की कार्यप्रणाली की समीक्षा की, कर्मचारियों से पूछताछ की और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया। इसके बाद औपचारिक आपराधिक जांच शुरू हुई।
फिलहाल इस मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गबन कैसे किया गया, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी और यह सिलसिला कितने समय से चल रहा था। जांच में दान राशि की गणना प्रक्रिया, गणना केंद्र तक पहुंच, कर्मचारियों की गतिविधियों और नकदी को कथित तौर पर छिपाने व बाहर ले जाने के तरीकों की भी पड़ताल की जा रही है।
Updated on:
17 Jul 2026, 10:54 AM IST
Published on:
17 Jul 2026, 10:26 AM IST
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