
Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या राम मंदिर में चंदा-चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान चोरी हुई थी। जांच में आरोपियों के बैंक खातों और 35 दिनों की CCTV फुटेज की भी जांच की गई है। तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले में ऑडिट कराया गया है। चढ़ावे से जुड़ी सभी वस्तुएं और सबूत सुरक्षित हैं। जांच से संबंधित दस्तावेज भी अदालत के रिकॉर्ड पर रखे गए हैं। साथ ही कोर्ट ने राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की जगह को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान सामने आया कि कुछ आरोपियों ने कथित चोरी की इस रकम से संपत्तियां खरीदी हैं और निवेश भी किया है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक संपत्ति की रजिस्ट्री में कीमत 15 लाख रुपये दिखाई गई थी जबकि उसकी वास्तविक बाजार कीमत करीब 50 लाख रुपये थी। ऐसे में जांच एजेंसियों को आशंका है कि लगभग 35 लाख रुपये नकद दिए गए हैं। एजेंसियों का यह भी कहना है कि संबंधित व्यक्ति के पास आय का कोई दूसरा स्रोत नहीं था और यह रकम कथित तौर पर चोरी के पैसों से ही आई हो सकती है। तुषार मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में ऑडिट कराया गया है और चढ़ावे से जुड़ी सभी वस्तुएं और सबूत सुरक्षित हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दी गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है। ऐसे में अब संबंधित निचली अदालत कानून के मुताबिक इस मामले का संज्ञान ले और आगे की कार्रवाई करे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट भी दी है कि वे निचली अदालत के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं। वे चाहें तो मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के तौर पर ट्रायल कोर्ट की सहायता भी कर सकते हैं।
इसी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया जिसमें यह जांच कराने की मांग की गई थी कि अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण उसी स्थान पर हुआ है या नहीं जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आदेश दिया था। इस पर अदालत ने साफ कहा कि यदि याचिकाकर्ता को जमीन के रिकॉर्ड या संबंधित दस्तावेजों को लेकर कोई भी आपत्ति है तो वह इसके लिए सिविल कोर्ट का रुख कर सकता है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर से जुड़े इन दोनों अहम मामलों का निपटारा कर दिया है।
याचिका में अदालत से एक स्वतंत्र समिति या आयोग का गठन करने की भी मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस आयोग में सर्वे राजस्व पुरातत्व और अन्य तकनीकी क्षेत्रों के योग्य विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि वर्तमान में बना राम मंदिर उसी जगह और जमीन पर स्थित है या नहीं जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। लेकिन अदालत ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया।