अयोध्या राम मंदिर को निशाना बनाने वाले आतंकी अब्दुल रहमान की फरीदाबाद जेल में हत्या हो गई थी। बुधवार को उसका शव उसके पैतृक गांव अयोध्या के मंजनाई पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया।
अयोध्या के मंजनाई गांव में उस समय मातम छा गया। जब 20 वर्षीय अब्दुल रहमान का शव फरीदाबाद जेल से लाया गया। जनाजा उठते ही परिवार में कोहराम मच गया। मां और बहन रो-रोकर बेहाल हो गईं। गांव के करीब 200 लोगों की मौजूदगी में नमाज के बाद उसे घर से करीब 500 मीटर दूर कब्रिस्तान में दफनाया गया। पूरे गांव में गम का माहौल था। जनाजे के समय हर आंख नम थी। मां बेटे का चेहरा देखकर बेसुध हो गईं। जबकि बहनें और अन्य परिजन बिलखते रहे। नमाज-ए-जनाजा अदा करने के बाद शव को कब्रिस्तान ले जाया गया। जहां सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
अब्दुल रहमान की 8 फरवरी को फरीदाबाद जेल में हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि एक साथी कैदी ने उसके सिर पर पत्थर से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। 9 फरवरी को परिवार को जेल प्रशासन की ओर से फोन कर घटना की जानकारी दी गई। सूचना मिलने पर परिजन पहले हैरान रह गए। पिता अबु बकर को शुरू में लगा कि शायद कोई गलत खबर है। लेकिन वकील से पुष्टि होने के बाद वे फरीदाबाद के लिए रवाना हो गए।
पिता ने बताया कि वे 5 फरवरी को ही बेटे से मिलकर लौटे थे। उस समय अब्दुल ने कहा था कि उसे जेल में कोई परेशानी नहीं है। उसने यह भी बताया था कि कुछ दिन पहले एक नया कैदी उनकी बैरक में आया है। परिवार ने जब हालचाल पूछा तो उसने सब ठीक बताया था। पिता के मुताबिक, बेटे की जमानत भी जल्द होने की उम्मीद थी। अब्दुल के चाचा उस्मान ने जेल प्रशासन के व्यवहार पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि उन्हें शव को ठीक से देखने तक नहीं दिया गया। वे यह जानना चाहते थे कि शरीर पर और कहां-कहां चोट के निशान हैं। लेकिन उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई।
अब्दुल रहमान को 2 मार्च 2025 को गुजरात एटीएस ने गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों ने उस पर राम मंदिर को निशाना बनाने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। एजेंसियों का दावा था कि वह प्रतिबंधित संगठन अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़े एक व्यक्ति के संपर्क में था। गिरफ्तारी के समय उसके पास से दो जिंदा हैंड ग्रेनेड मिलने की भी बात कही गई थी। जिन्हें बाद में निष्क्रिय कर दिया गया था। परिवार ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके।