OP Rajbhar Latest News: क्या ओपी राजभर अकेले चुनाव लड़ने के मूड में हैं? उनकी किस सीट पर पैनी नजर बनी हुई है? जानिए संजय निषाद के लिए उन्होंने क्या कहा?
OP Rajbhar Latest News: पूर्वांचल की राजनीति में सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आयोजित सामाजिक समरसता रैली में भारी भीड़ जुटाकर राजभर ने ना सिर्फ अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया, बल्कि सहयोगी दल BJP समेत पूरे पूर्वांचल की राजनीति में कई सवाल भी खड़े कर दिए।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि लगातार रैलियों और शक्ति प्रदर्शन के जरिए राजभर क्या कोई बड़ा संदेश देना चाह रहे हैं, या फिर आने वाले चुनावों से पहले अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। सावल ये भी है क्या ओपी राजभर अकेले चुनाव लड़ने के मूड में हैं?
26 अप्रैल को वाराणसी के पिंडरा स्थित एक इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित सामाजिक समरसता रैली को सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने इस आयोजन को खास बना दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जातीय और सामाजिक समीकरणों के जानकार ओमप्रकाश राजभर का हर कदम रणनीति के तहत होता है। ऐसे में इस रैली को भविष्य की किसी बड़ी राजनीतिक तैयारी के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
राजभर की लगातार सक्रियता के बीच यह सवाल भी उठने लगा कि क्या वह भविष्य में अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति बना रहे हैं। हालांकि एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान इस पर खुद ओमप्रकाश राजभर ने साफ किया कि फिलहाल ऐसा कोई इरादा नहीं है। बातचीत में राजभर ने स्पष्ट कहा कि उनका अलग चुनाव लड़ने का कोई मूड नहीं है। उन्होंने कहा कि वह BJP गठबंधन में रहकर ही काम करना चाहते हैं और गठबंधन को मजबूत करने की दिशा में तैयारी कर रहे हैं।
उनका यह रुख काफी हद तक निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद की रणनीति जैसा माना जा रहा है, जिन्होंने BJP को बड़ा भाई बताते हुए योगी-मोदी सरकार पर भरोसा जताया था।
बातचीत के दौरान आजमगढ़ की अतरौलिया विधानसभा सीट को लेकर भी राजभर ने अपने संकेत दिए। आजमगढ़ की अतरौलिया सीट को लेकर ओमप्रकाश राजभर की राय पूछी गई तो उन्होंने संजय निषाद को अपना बड़ा भाई बताया। साथ ही कहा कि ये घर की बात है।सहयोगियों के बीच बैठकर इसका समाधान निकाला जाएगा। इस बयान से साफ है कि अतरौलिया सीट उनकी राजनीतिक प्राथमिकताओं में अब भी शामिल है।
बातचीत में ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आजमगढ़ और अतरौलिया क्षेत्र में अपने द्वारा कराए गए विकास कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि क्षेत्र में उनकी राजनीतिक जमीन और पकड़ अब भी मजबूत है।
सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि अगर उनकी नजर अतरौलिया सीट पर है, तो फिर वाराणसी में इतनी बड़ी रैली के जरिए ताकत दिखाने का उद्देश्य क्या है? इस पर राजभर ने कहा कि वाराणसी की जनता ने PM नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों पर भरोसा जताया है और वह उसी भरोसे को और मजबूत करने के प्रयास में जुटे हैं।
राजभर ने कहा कि उनकी कोशिश प्रधानमंत्री मोदी के सपनों के भारत को और मजबूती देने की है। उनके मुताबिक सामाजिक समरसता रैली इसी दिशा में एक संदेश भी है और जनसमर्थन का प्रदर्शन भी।
राजभर ने इस रैली को विपक्ष के लिए भी संदेश बताया। उनका कहना है कि अगर जनता का भरोसा जीतना है तो सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर काम करना होगा। राजनीतिक विश्लेषक इसे सिर्फ सहयोगी दल के समर्थन की रैली नहीं, बल्कि राजभर की राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन और भविष्य की भूमिका तय करने की कवायद भी मान रहे हैं।
वाराणसी रैली और अतरौलिया सीट को लेकर दिए गए संकेतों ने यह साफ कर दिया है कि ओमप्रकाश राजभर आने वाले चुनावों को लेकर सक्रिय रणनीति पर काम कर रहे हैं। फिलहाल उन्होंने गठबंधन में बने रहने की बात कही है, लेकिन उनकी रैलियां, शक्ति प्रदर्शन और सीटों पर नजर यह संकेत जरूर दे रही हैं कि पूर्वांचल की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे सकते हैं।