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पंचायत चुनाव: ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को बढ़ाने या उन्हें प्रशासक नियुक्त करने का प्रावधान है भी या नहीं? बरेली में क्या बोले DPRO

Panchayat Chunav Update: पंचायत चुनाव से पहले बड़ी खबर सामने आई है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने पर जानिए DPRO का क्या कहना है?
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पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट। फोटो सोर्स-ai

Panchayat Chunav Update: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर एक ओर मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है, वहीं दूसरी ओर पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी भी शुरू हो गई है। चुनाव की संभावित देरी के बीच बरेली जिला प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था पर मंथन कर रहा है।

28 मई तक होगा डुप्लीकेट मतदाताओं का सत्यापन

पंचायत चुनाव की प्रक्रिया के तहत डुप्लीकेट मतदाताओं के सत्यापन का काम 28 मई तक पूरा किया जाना है। इसके बाद 10 जून को मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन प्रस्तावित है। प्रशासन इस प्रक्रिया को चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा मान रहा है, हालांकि चुनाव कार्यक्रम को लेकर अब तक स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।

26 मई को खत्म हो रहा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल

मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि चुनाव समय पर नहीं होने की स्थिति में पंचायतों का संचालन कैसे होगा। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी में जुटा हुआ है।

हालांकि, अब तक राज्य निर्वाचन आयोग या शासन की ओर से प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर कोई औपचारिक दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं, जिससे स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है।

1188 ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था की चुनौती

बरेली जनपद में 1188 ग्राम पंचायतें, जिला पंचायत के 60 वार्ड और बड़ी संख्या में क्षेत्र पंचायत सदस्य हैं, जिनके लिए वर्ष 2021 में चुनाव कराए गए थे। अब इन प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है। प्रशासनिक स्तर पर पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे। मार्च के दौरान तैयारियों को देखकर ऐसा माना भी जा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे चुनावी गतिविधियां धीमी पड़ गईं और मामला फाइलों तक सीमित होता नजर आया।

चुनाव टलने से दावेदारों की रणनीति पर असर

पंचायत चुनाव में देरी का असर संभावित प्रत्याशियों पर भी पड़ा है। कई दावेदारों ने जनवरी से ही चुनावी माहौल बनाना शुरू कर दिया था। गांवों में मतदाताओं को साधने के लिए दावतों और जनसंपर्क का दौर भी शुरू हो चुका था, लेकिन जैसे-जैसे चुनाव टलने के संकेत मिलने लगे, यह गतिविधियां भी थम गईं। कई दावेदार अब नई तारीखों के इंतजार में अपनी रणनीति दोबारा तय करने में जुटे हैं।

प्रशासक नियुक्ति पर शासन के निर्देश का इंतजार

DPRO कमल किशोर का कहना है कि कार्यकाल समाप्त होने से करीब एक सप्ताह पहले शासन की ओर से प्रशासक नियुक्त करने को लेकर दिशा-निर्देश मिलने की संभावना है। फिलहाल कोई आदेश नहीं आया है, लेकिन प्रशासन संभावित विकल्पों पर विचार कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने या उन्हें ही प्रशासक बनाए जाने का कोई प्रावधान फिलहाल नहीं है।

निर्वाचन कार्यालय ने झाड़ा पल्ला

जिला सहायक निर्वाचन अधिकारी सतीश मौर्य ने कहा कि पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने की प्रक्रिया में निर्वाचन कार्यालय की कोई भूमिका नहीं है। उनका कहना है कि फिलहाल चुनाव कार्यालय का फोकस डुप्लीकेट मतदाताओं के सत्यापन और मतदाता सूची को अंतिम रूप देने पर है।

चुनाव को लेकर बढ़ी उत्सुकता

पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सुकता बनी हुई है। एक ओर मतदाता सूची का काम जारी है, दूसरी ओर प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने की समयसीमा नजदीक है। ऐसे में अब सबकी नजर शासन और राज्य निर्वाचन आयोग के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

प्रशासनिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया दोनों पर सवाल

चुनाव में संभावित देरी और प्रशासक नियुक्ति की तैयारी ने प्रशासनिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया दोनों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में शासन के निर्देश तय करेंगे कि पंचायतों में प्रशासक बैठेंगे या चुनाव को लेकर कोई नई घोषणा होगी। फिलहाल बरेली समेत पूरे क्षेत्र में इसको लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज है।

पंचायती राज मंत्री ने क्या कहा?

बता दें कि पंचायती राज मंत्री पहले ही साफ कर चुके हैं कि आगे की कार्रवाई पंचायती राज एक्ट और अदालत के रुख के अनुसार तय की जाएगी।