बागपत

135KM यूपी से गुजरेगा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे, ऊपर फर्राटा भरेंगी गाड़ियां, नीचे से गुजरेंगे हाथी-बाघ और हिरण

Delhi-Dehradun Expressway : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया। 212 किमी लंबे इस एक्सप्रेस-वे में एशिया का सबसे बड़ा 12 किमी लंबा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर है, जिससे अब दिल्ली से देहरादून का सफर आसान होगा।

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Apr 14, 2026
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का आज पीएम मोदी ने किया उद्घाटन, PC- ANI

बागपत : दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया। यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होता है। इसके बाद लोनी से यह यूपी में प्रवेश करता है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे की यूपी में कुल लंबाई 135 किलोमीटर है। इस एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 212 किलोमीटर है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे देश का पहला वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है।

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4 साल में बनकर तैयार हुआ एक्सप्रेस-वे

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे 4 साल में बनकर तैयार हुआ। यह एक्सप्रेस-वे 12 हजार करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ। इस एक्सप्रेस-वे का 64 प्रतिशत हिस्सा यूपी से होकर गुजरता है। एक्सप्रेस-वे की शुरुआत में 18 किलोमीटर तक कोई टोल नहीं है।

गाजियाबाद से शुरू होने वाला यह 212 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे बागपत जिले में प्रवेश करता है। यहां यह एक्सप्रेस-वे लगभग 45 से 50 किलोमीटर तक फैला हुआ है, जो किसी भी एक जिले में इसकी सबसे लंबी दूरी है। यह हिस्सा पूरी तरह ग्रीनफील्ड है, यानी जहां पहले केवल खेत थे, वहां अब यह आधुनिक एक्सप्रेस-वे गुजर रहा है।

बागपत में खेकड़ा, बागपत और बड़ौत में इंटरचेंज बनाए गए हैं। इसके बाद एक्सप्रेस-वे शामली जिले में पहुंचता है, जहां यह 35 से 40 किलोमीटर की दूरी तय करता है। शामली और कैराना में इंटरचेंज बनाए गए हैं। हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमा होने के कारण इन इंटरचेंजों का विशेष महत्व है।

शामली के बाद एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के अंतिम जिले सहारनपुर में दाखिल होता है। यहां भी इसकी लंबाई 45 से 50 किलोमीटर है। देवबंद के आगे सहारनपुर में एक बड़ा इंटरचेंज बनाया गया है।

ट्रैफिक की समस्या को ध्यान में रखते हुए पूरे 212 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे पर 113 अंडरपास, 5 रेलवे ओवरब्रिज और 62 बस शेल्टर बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए बस शेल्टरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। एक्सप्रेस-वे पर 16 एंट्री-एग्जिट पॉइंट बनाए गए हैं। इमरजेंसी स्थिति में त्वरित मदद के लिए बीच-बीच में इमरजेंसी लेन भी बनाई गई है।

सुरक्षा के लिहाज से पूरे रास्ते पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों की मदद से किसी भी दुर्घटना की सूचना मिलते ही मात्र 10 मिनट में मदद पहुंचाई जा सकेगी। इस एक्सप्रेस-वे पर अधिकतम 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलाए जा सकते हैं। इससे अधिक स्पीड पर हाई-टेक सेंसर के जरिए स्वतः चालान कट जाएगा।

हरिद्वार-रुड़की तक 50KM का 6 लेन रास्ता

सहारनपुर क्रॉस करने के बाद एक्सप्रेस-वे उत्तराखंड में प्रवेश करता है। यहां रुड़की और हरिद्वार आता है। हरिद्वार महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए सहारनपुर के हल्गोया गांव के पास से हरिद्वार-रुड़की तक लगभग 50 किलोमीटर का 6-लेन अलग रास्ता बनाया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कुंभ के दौरान हरिद्वार जाने वाले वाहनों को मुख्य एक्सप्रेस-वे पर निर्भर न रहना पड़े और एक्सप्रेस-वे जाम से मुक्त रहे।

जंगल के बीच से गुजरता अनोखा एक्सप्रेस-वे

हरिद्वार से देहरादून की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है। पहले लोग NH-58 या NH-307 का सहारा लेते थे, जो पहाड़ी रास्ता होने के कारण काफी समय लेता था। 50 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब 2 घंटे लग जाते थे।

अब इस यात्रा के लिए एक नया, तेज और आधुनिक विकल्प उपलब्ध है। हरिद्वार-देहरादून एक्सप्रेस-वे। लेकिन यह रास्ता राजाजी टाइगर रिजर्व और शिवालिक क्षेत्र से होकर गुजरता है, इसलिए इसके निर्माण के दौरान काफी विरोध भी हुआ था।

पर्यावरणविदों का तर्क था कि जंगल से सड़क गुजरने से वन्यजीवों को परेशानी होगी, इंसान-वन्यजीव संघर्ष बढ़ेगा और हजारों पेड़ काटने पड़ेंगे, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गईं। नवंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ कटाई पर अस्थाई रोक लगा दी और NGT को नए सिरे से जांच के निर्देश दिए।

सरकार और NHAI ने विशेषज्ञ पैनल के सामने अपना पक्ष रखा। NHAI ने आश्वासन दिया कि पेड़ों की कटाई को न्यूनतम रखा जाएगा और पूरा कॉरिडोर वन्यजीव-अनुकूल बनाया जाएगा। पैनल की रिपोर्ट और सरकार के पक्ष को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक्सप्रेस-वे के निर्माण की अनुमति दे दी।

12 KM लंबा बनाया एलिवेटेड सेक्शन

वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व और शिवालिक क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे को पूरी तरह एलिवेटेड बनाया गया है। यहां लगभग 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन बनाया गया है, जो गणेशपुर (हरिद्वार) से आशारोड़ी (देहरादून) के बीच स्थित है।

यह एशिया में जंगल के अंदर बना अब तक का सबसे लंबा एलिवेटेड एक्सप्रेस-वे है। इसके बनने से वाहन ऊपर से तेज गति से गुजरेंगे, जबकि नीचे से जंगली जानवर (बाघ, हाथी, हिरण आदि) बिना किसी बाधा के अपना पारंपरिक रास्ता इस्तेमाल कर सकेंगे।

एलिवेटेड सेक्शन में इन बातों का रखा गया ध्यान

गणेशपुर से आशारोड़ी के बीच 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर, जिसके ऊपर वाहन और नीचे जानवरों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की गई है। पूरे कॉरिडोर की ऊंचाई 6 से 7 मीटर रखी गई है, ताकि हाथी जैसे बड़े जानवर भी आसानी से गुजर सकें। डिजाइन हाथियों के पारंपरिक माइग्रेशन रूट को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। वाहनों के शोर और तेज रोशनी को रोकने के लिए नॉइज बैरियर और लाइट कंट्रोल सिस्टम लगाए गए हैं। रात में जानवरों की दिशा निर्देशित करने के लिए पीली लाइटिंग का इस्तेमाल किया गया है।

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Updated on:
14 Apr 2026 03:03 pm
Published on:
14 Apr 2026 02:59 pm
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