बहराइच

भेड़ियों के हमले से 14 लोगों की हुई थी मौत; मौत के खौफ में जी रहे थे लोग, अब बहराइच में कैसे हैं हालात?

बहराइच में पिछले साल भेड़ियों के हमले से 14 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस वर्ष भेड़ियों के हमलों की घटनाओं पर लगाम लगी है। जानिए इसके पीछे की वजह...
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Jun 21, 2026
सांकेतिक तस्वीर (फोटो जेनरेट AI)
सांकेतिक तस्वीर (फोटो जेनरेट AI)

उत्तर प्रदेश की बहराइच जिले में पिछले साल भेड़ियों के आतंक से जिले के कई क्षेत्र प्रभावित रहे। भेड़ियों की दहशत से यहां के ग्रामीणों की नींद उड़ गई थी। भेड़ियों के हमले में 14 लोगों की जान भी गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए। इस वर्ष मामला पूरी तरह से शांत है। बहराइच जिले में अब तक मानव-भेड़िया संघर्ष की कोई घटना दर्ज नहीं हुई है। वन विभाग इसे भेड़ियों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण और संवेदनशील गांवों में किए गए सर्वे का परिणाम मान रहा है। प्रशासन अब भेड़ियों की वैज्ञानिक गणना और आवास संरक्षण की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है।

बहराइच जिले में पिछले वर्ष भेड़ियों के हमलों ने लोगों के बीच भारी भय का माहौल पैदा कर दिया था। कई गांवों में लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर थे। हमलों में कई लोगों की जान गई थी। बड़ी संख्या में ग्रामीण घायल हुए थे। हालांकि, इस बार तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। वर्ष 2026 में अब तक जिले में मानव और भेड़िए के बीच संघर्ष की कोई घटना सामने नहीं आई है।

भेड़ियों के रहने के स्थानों को सुरक्षित किया गया

बहराइच के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) एस. सुंदरैश ने बताया कि केवल हमलों के बाद कार्रवाई करने के बजाय इस बार समस्या की जड़ तक पहुंचने की कोशिश की गई। भेड़ियों के रहने वाले इलाकों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने पाया कि घाघरा नदी के किनारे अवैध बालू खनन और अनधिकृत खेती जैसी गतिविधियों के कारण भेड़ियों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे थे, जिससे वे आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे थे।

भेड़ियों के संरक्षण के लिए लागू की गई नीति

मांद वाले क्षेत्रों को सुरक्षित करने, अवैध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और ग्रामीणों को जागरूक करने जैसे कदम उठाए गए। प्रशासन ने उन गांवों का भी सर्वे कराया जहां पिछले वर्ष हमलों की घटनाएं अधिक हुई थीं। सर्वे में बड़ी संख्या में ऐसे घर मिले जहां मुख्य दरवाजे, बिजली और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। अधिकारियों का मानना है कि खुले में शौच और रात के समय घरों की अपर्याप्त सुरक्षा भी जोखिम बढ़ाने वाले कारणों में शामिल रहे हैं। इसलिए अब शौचालय निर्माण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है।

अब भेड़ियों की वैज्ञानिक गणना

वन विभाग जल्द ही घाघरा नदी के किनारे फैले क्षेत्र में भेड़ियों की पहली वैज्ञानिक गणना कराने की तैयारी कर रहा है। साथ ही सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाकर वहां बांस आधारित हरित क्षेत्र विकसित करने की योजना भी बनाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक आवास मजबूत होने से वन्यजीव और मानव के बीच टकराव की संभावनाएं और कम होंगी। बहराइच का यह मॉडल अब मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के एक सफल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। जहां संरक्षण और विकास दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की गई है।

Updated on:
21 Jun 2026 06:58 pm
Published on:
21 Jun 2026 06:58 pm