Rape case: बलरामपुर जिले के एक पंचायत ने सुनाया अजीब फरमान, पीडि़ता व उसके परिवार के सदस्यों ने पुलिस से लगाई न्याय की गुहार, गर्भवती है पीडि़ता
वाड्रफनगर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां बलात्कार पीडि़ता (Rape case) और उसके परिवार को न्याय दिलाने के बजाय गांव की पंचायत द्वारा ही सामाजिक दंड सुना दिया गया। आरोप है कि गांव के सरपंच ने पीडि़ता और उसके पूरे परिवार को 12 साल तक समाज से बहिष्कृत करने का फरमान जारी कर दिया। पीडि़ता और उसके परिवार ने इस मामले की शिकायत एसडीओपी से कर न्याय की गुहार लगाई है।
मामला वाड्रफनगर के बसंतपुर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। गांव की एक युवती के साथ बलात्कार (Rape case) की घटना हुई थी। पीडि़ता इस समय गर्भवती बताई जा रही है। जब पीडि़ता के परिवार ने आरोपी के खिलाफ पुलिस में शिकायत कर एफआईआर दर्ज कराने की पहल की तो गांव में पंचायत बुलाई गई।
बताया जा रहा है कि पंचायत में गांव के सरपंच और कुछ ग्रामीणों ने मिलकर पीडि़ता के परिवार को ही दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ सामाजिक दंड देने का निर्णय ले लिया। पीडि़ता के परिजन का आरोप है कि पंचायत में सरपंच ने यह फैसला सुनाया कि पीडि़ता और उसके पूरे परिवार को 12 साल तक गांव के समाज से बहिष्कृत (Rape case) रखा जाएगा।
इस फैसले के बाद परिवार को गांव के सामाजिक कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों और सामुदायिक गतिविधियों से दूर रहने के लिए कहा गया। ग्रामीणों के इस फैसले से पीडि़त परिवार काफी परेशान और भयभीत है।
पीडि़त परिवार ने मामले (Rape case) की शिकायत एसडीओपी से कर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं इस मामले में पीडि़ता की शिकायत के बाद बसंतपुर पुलिस ने बलात्कार के आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। आरोप है कि पंचायत द्वारा पीडि़ता के परिवार के सामने कुछ अपमानजनक शर्तें भी रखी गई हैं। बताया जा रहा है कि सरपंच ने कहा कि यदि पीडि़ता (Rape case) का परिवार अपनी गलती स्वीकार करता है तो उन्हें पूरे गांव के लोगों के पैर धोकर उस पानी से नहलाया जाएगा।
इसके अलावा दंड के रूप में पूरे समाज को बकरा और शराब देने की भी बात कही गई है। इस तरह के फैसले को लेकर गांव में भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
वाड्रफनगर एसडीएम नीरनिधि नंदेहा का कहना है कि मामला (Rape case) प्रशासन के संज्ञान में आया है। दोनों पक्षों को बुलाकर बैठाया जाएगा और पूरे मामले की जांच के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।