पूर्व मंत्री शिवप्रताप यादव ने कहा राजनीतिक दबाव के चलते उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है, देखें वीडियो
बलरामपुर. अवैध रूप से कारतूस बेचने के आरोप में सपा सरकार में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री रहे डॉ. शिवप्रताप यादव के बेटे पर एफआईआर दर्ज की गई है। पूर्व मंत्री के पुत्र के नाम संचालित हो रहे 'यादव गन हाउस' में भारी अनियमितता पाई गई। उपजिलाधिकारी अरुण कुमार गौड़ की तहरीर पर कोतवाली नगर में धारा 465, 468 के अंतर्गत गन हाउस पर मुकदमा पंजीकृत किया गया है। मंत्री के बेटे पर अलग-अलग दो मामलों में मुकदमा दर्ज किया गया है। पूर्व मंत्री शिवप्रताप यादव को मुलायम सिंह यादव का खासा करीबी माना जाता है।
जिला मुख्यालय के पहलवारा स्थित यादव गन हाउस के द्वारा फर्जी तरीके से कारतूस बेचे जाने का मामला प्रकाश में आया था। शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की गई तो गन हाउस में एक के बाद एक अनियमितता के मामले सामने लगे। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते जांच और तेज कर दी। गन हाउस की जांच उपजिलाधिकारी और क्षेत्राधिकारी सदर को सौंपी गयी थी।
फर्जी कारतूस बिक्री करने का आरोप
29 दिसंबर 2017 को थाना हरैया के ग्राम भटपुरवा निवासी राजेश्वर तिवारी द्वारा शिकायत मिली थी कि उनके शस्त्र लाइसेंस संख्या 3/थाना हरैया पर 315 बोर के 10 अदद कारतूस फर्जी तरीके से विक्रय करके विक्रय पंजिका में दर्ज कर दिया गया है, जबकि उन्होंने कोई कारतूस उस तारीख को नहीं खरीदा है। प्रशासन ने इस मामले की जांच कराई तो शिकायत सही पाई गई। इसी बीच 4 जनवरी 2018 को कोतवाली नगर क्षेत्र के मोहल्ला बलुहा निवासी मोहम्मद रफी ने शिकायत की थी कि उनके शस्त्र लाइसेंस संख्या 1173 डीएम थाना कोतवाली नगर के नाम 4 जनवरी तथा 9 जनवरी 2018 को 32 बोर के 10-10 कारतूस यादव गन हाउस द्वारा बिक्री किए गए हैं, जिसे ब्रिकी रजिस्टर पर भी चढ़ाया गया है। लेकिन उनके द्वारा इस तारीख को कोई भी कारतूस खरीद नहीं की गई है और उनके लाइसेंस बुक पर भी ऐसा कुछ चढ़ाया नहीं गया है। जिला प्रशासन ने मामलों की जांच की शिकायत सही पाया। इसके बाद उपजिलाधिकारी अरुण कुमार गौड़ ने कोतवाली नगर में मुकदमा पंजीकृत कराया।
राजनीतिक दबाव के चलते विरोधी कर रहे बदनाम : पूर्व मंत्री
मामले पर पूर्व मंत्री शिवप्रताप यादव का कहना है कि उनके गन हाउस द्वारा किसी भी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं की गई है। यह सब राजनीतिक दबाव के चलते किया जा रहा है। उनके विरोधी उन्हें बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं और प्रशासन के लोग भी सत्ता के दबाव में शायद ऐसा करने को मजबूर हैं।
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