
बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को हालिया मंत्रिमंडल विस्तार से नाराज कांग्रेस विधायकों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वे इस्तीफे सौंपते हैं तो उन्हें तत्काल स्वीकार कर लिया जाएगा।शिवकुमार ने मंत्री पद से वंचित पार्टी विधायकों के बीच नाराजगी की अटकलों को खारिज किया और इस बात पर जोर दिया कि पार्टी का अनुशासन सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि अगर कोई विधायक इस्तीफा देने आता है, तो मैं तुरंत इस्तीफा स्वीकार कर लूंगा। पार्टी महत्वपूर्ण है और पार्टी में अनुशासन महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को भी मंत्री बनने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र पाटिल के समय एस. बंगारप्पा, मल्लिकार्जुन खरगे और धरम सिंह जैसे नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी। उन्होंने यह भी कहा कि अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में उन्हें और गृह मंत्री जी परमेश्वर को भी ऐसे ही हालात का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि हर किसी की महत्वाकांक्षाएं होती हैं, लेकिन अवसर समय के साथ आते हैं। हमने भी इंतजार किया था। हर किसी को धैर्य रखना चाहिए।
शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने मंत्रिमंडल विस्तार पर सामूहिक निर्णय लिया था और इस पर दोबारा विचार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि कई वरिष्ठ नेता होने के बावजूद, पार्टी ने विस्तारित मंत्रालय में कई नए चेहरों को अवसर देना चुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी के पहले के फैसले के अनुसार कर्नाटक के बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों का कार्यकाल ढाई साल का होगा। इसी वजह से उन्होंने सभी अध्यक्षों से इस्तीफा देने को कहा है। उन्होंने कहा कि मैं पहले पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करूंगा और फिर विधायकों को चर्चा के लिए बुलाऊंगा। हम सभी का सम्मान करेंगे।
शिवकुमार ने कहा कि वह अपनी बात विधायकों तक पहले ही पहुंचा चुके हैं और अब इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहना चाहते। उन्होंने मंत्रियों को सूखे से राहत के कामों पर तुरंत ध्यान देने का निर्देश दिया और कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सरकार की पहली प्राथमिकता लोगों के काम और शासन होना चाहिए। ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब नवीनतम मंत्रिमंडल फेरबदल में नजरअंदाज किए गए कई कांग्रेस विधायकों के बीच नाराजगी की रिपोर्टें आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे विधायकों की अनदेखी से नाराज दो विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है।