
चित्रदुर्गा. शांतिनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ हिरियूर में आचार्य कीर्तिप्रभ सूरीश्वर की निश्रा में मुनि संयमप्रभ विजय ने कहा कि चारित्र धर्म के पालन से सुख की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति चारित्र का पूर्ण तरीके से पालन करते हैं उन्हें ही आत्मसुख का आस्वादन हो सकता है। संसार के भौतिक सामग्री के सुख नाशवंत हैं। आत्मा का सुख कायमी है। आत्मिक सुख से ही व्यक्ति को संतोष हो सकता है। संसार के भौतिक सुख सामग्री या साधनों से व्यक्ति को कभी सुख मिलने वाला नहीं है। आत्मिक सुख पाना हो तो चारित्र का पालन करना अनिवार्य है।
रात्रि भोजन का त्याग करें
मैसूरु. स्थानकवासी जैन संघ के तत्वावधान में चातुर्मास के लिए सिटी स्थानक में विराजित डॉ समकित मुनि ने कहा कि जैनी कहलाने की परिभाषा व्यसन से मुक्त, घर में नमस्कार महामंत्र का स्मरण और रात्रि भोजन त्याग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक जैनी को यह भी ध्यान रखना होगा कि वह अनछाना पानी का सेवन नहीं करें और अभक्ष्य खाना नहीं खाए। सिर्फ जैन परिवार में जन्म लेने मात्रा से कोई जैनी नहीं बन जाता, वह तो आचरण से जैन कहलाता है। हमें आचरण स्वच्छ, सुन्दर और श्रेष्ठ रखते हुए हमारे पूर्वजों की पहचान को बनाया रखना होगा।
मुनि ने कहा कि जैनियों के प्रति आदर्श भाव, सम्मान और प्रतिष्ठा सदियों से उच्च स्थान पर रहे हुए हैं। समय के साथ आज मनुष्य की दिनचर्या और जीवन शैली ही बदलती जा रही है। ज्यादातर लोग अपना समय और दिमाग जहां लगाना चाहिए, वहां पर नहीं लगाते हैं और जहां नहीं लगाना चाहिए, वहां पर लगाते हैं। इसलिए तो हमारी पहचान, संस्कृति और घराना पर आंच लगने लगे हैं। भवांत मुनि ने 10 उपवास के प्रत्याख्यान एवं 6 उपवास के प्रत्याख्यान के प्रति मंगलकामना अर्पित की। जयवंत मुनि ने सामूहिक प्रार्थना करवाई। संघ अध्यक्ष कैलाशचंद बोहरा ने स्वागत किया। मंत्री सुशील नंदावत ने संघ सूचनाएं दी। शिक्षण संघ के अध्यक्ष बुधमल बाघमार ने बताया कि मंगलवार को अष्टमी को सामूहिक एकसाना दिवस के रूप में मनाया जाएगा।