
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर सीआइटीबी चोल्ट्री में श्रुत मुनि ने कहा कि उत्तर दिशामुखी सांतवा मंगल दर्पण हमें यह प्रेरणा देता है कि 'आत्मा को देखो दर्पण' यानी दर्पण में शरीर, काया, देह, रूप को नहीं देखते हुए आत्मा को देखना चाहिए। राजा भरत चक्रवर्ती और राजुल देवी ने दर्पण में देवरूप प्रतिबिंब देखकर दीक्षित होते हुए केवलज्ञान को प्राप्त किया। उत्तर दिशा में श्रमण, ब्राह्मण, अतिथि, मैत्री का वास होना चाहिए। शास्त्रों में उत्तर दिशा को मंगल बताते हुए कहा गया है कि शुभ कार्य करने से पहले उत्तर दिशा में मुंह करके भगवान का वंदन करना चाहिए। उत्तर मुखी दिशा ऊर्जा से परिपूर्ण होते हुए शांतिदायक, सफलतादायी, प्रेमदायक है। यह हमेशा खुली हुई रखनी है।
नवकार मंत्र की भक्ति करवाई
बेंगलूरु. सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम में आचार्य चंद्रयश सूरीश्वर व प्रवर्तक कलापूर्ण विजय की निश्रा में सोमवार को महाप्रभाविका चिंतामणी पाŸवनाथ परमात्मा की आराधना साधना संपन्न हुई। आचार्य ने चिंतामणी पार्श्वनाथ की आराधना की महिमा बताते हुए कहा कि यह मंत्र कामधेनु कलावृक्ष समान है। पूर्वाचार्य विद्वान भद्रबाहु स्वामी महाराजा रचित उपसग्गहर स्तोत्र का यह मूल मंत्र है। पार्श्वनाथ भगवान की आराधना से जीव को समाधि की प्राप्ति होती है। परिवर्तन संसार को नियम है। इस संसार में प्रतिपल नित नए परिवर्तन हो रहे हैं। निलेशभाई शाह ने नवकार मंत्र की भक्ति करवाई।
प्रश्नोत्तरी में एफसीआई जयनगर प्रथम
बेंगलूरु. नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) उपक्रम बेंगलूरु के तत्वावधान में सोमवार को बीइएल के कार्पोरेट कार्यालय में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें शहर के विभिन्न पीएसयू की 16 टीमों ने भाग लिया। बीइएल कार्पोरेट कार्यालय के महाप्रबंधक (मानव संसाधन) विक्रमन एन. व अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन) चिन्नराजा राय ने उद्घाटन किया।
प्रश्नावली में भारतीय खाद्य निगम क्षेत्रीय कार्यालय जयनगर की टीम ने प्रथम पुरस्कार, पॉवर ग्रिड की टीम ने द्वितीय पुरस्कार व बीइएमएल कार्पोरेट कार्यालय की टीम ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया जबकि बीइएल कार्पोरेट कार्यालय तथा एचएएल (एआरडीसी) की टीमों ने सांत्वना पुरस्कार पाए। प्रश्रावली का संचालन डेयर (डीआरडीओ) डॉ महेश ने किया। प्रेक्षक के रूप में डेयर (डीआरडीओ) डॉ जीआर चौधरी भी उपस्थित थे। संचालन राजभाषा अधिकारी श्रीनिवास राव ने किया।