
Male Sterilization Report: महिलाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का दंभ भरने वाला पुरुष आज भी अपनी रुढ़िवादी सोच से बाहर नहीं निकल पा रहा है। बढ़ती आबादी के नियंत्रण में 'जननी' दोहरी जिम्मेदारी के बोझ तले दब रही है। पुरुष प्रधान देश में बच्चों को जन्म देने और उन्हें दुनियां में आने से रोकने का जिम्मा भी 'मां' पर ही थोप दिया है।
हालत ये हैं कि सरकार के प्रयासों के बावजूद राजस्थान के पुरुष भ्रांतियों के चलते परिवार नियोजन एवं गर्भनिरोधक साधन अपनाने में औरतों को ही आगे कर रहे हैं। आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो पुरुषों की नसबंदी का आंकड़ा साल दर साल घट रहा है और अब स्थितियां ये हो गई हैं कि सरकार ने भी पुरुषों की नसबंदी को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीं, हर रोज राजस्थान की 3.74 लाख महिलाएं गर्भ निरोधक गोलियां गटक रही है।
इतना ही नहीं बच्चों में अंतर रखने का जिम्मा भी मांओं पर ही लाद रखा है। कई स्वास्थ्य सर्वेक्षणों में विशेषज्ञों ने खुलासा किया है कि लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियां लेने से ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर तक हो सकता है। इसके बावजूद गर्भनिरोधक साधन भी महिलाएं ही अपना रही हैं। माहवारी के 5वें दिन से माहवारी आने तक एक भी दिन चूके बिना उन्हें ही गोलियां गटकनी पड़ रही हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चौकाने वाले हैं….
| वर्ष | ऑरल पिल्स |
| 2021 | 3,14,750 |
| 2022 | 3,79,631 |
| 2023 | 3,58,031 |
| 2024 | 3,73,398 |
| 2025 | 3,74,933 |