बांसवाड़ा

Banswara Violence: युवक की हत्या के बाद हिंसा-आगजनी, दमकलों को घुसने नहीं दिया; बेबस देखती रही पुलिस

Banswara murder case: बांसवाड़ा जिले के टामटिया गांव में रविवार देर शाम से रात तक जो कुछ हुआ, वह अचानक भड़की हिंसा नहीं थी, बल्कि लंबे समय से सुलग रही रंजिश का नतीजा था।

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Banswara violence
घरों से उठती आग की लपटें व इनसेट में बेबस होकर देखती पुलिस। फोटो: पत्रिका

Banswara News: बांसवाड़ा जिले के टामटिया गांव में रविवार देर शाम से रात तक जो कुछ हुआ, वह अचानक भड़की हिंसा नहीं थी, बल्कि लंबे समय से सुलग रही रंजिश का नतीजा था। एक बस्ती को बीच से बांटती डामर सड़क के दोनों ओर रहने वाले परिवारों में छोटी-छोटी बातों पर अक्सर झगड़े होते रहे थे। एक महीने पहले भी दोनों पक्ष आमने-सामने आए थे, पशुओं के बाड़े तक जला दिए गए थे।

खेत में काम के दौरान गोविन्द मईड़ा के साथ मारपीट भी हुई थी। दोनों पक्षों ने मोटागांव थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई होती, तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते और गोविन्द की जान बच सकती थी।

भीड़ के हवाले हो गए हालात

रविवार शाम हालात तब बिगड़े, जब ईसरवाला से बारात लौटने के बाद गोविन्द अपने घर पहुंचा और कुछ ही देर में उस पर धारदार हथियारों से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने हालात अपने हाथ में ले लिए। गांव में तनाव इस कदर बढ़ गया कि पुलिस और फायर ब्रिगेड को अंदर तक घुसने नहीं दिया गया। डामर सड़क पर पत्थर और लकडियां डालकर रास्ता बंद कर दिया गया और पुलिस पर पथराव भी हुआ।

चार थानों, लाइन से बुलाया जाब्ता

बांसवाड़ा एसपी ने मौके पर लोहारिया, घाटोल, मोटागांव, सदर, रिजर्व पुलिस लाइन से अतिरिक्त जाब्ता भेजा। घाटोल डीएसपी महेन्द्र कुमार मेघवंशी, घाटोल थानाधिकारी, लोहारिया थानाधिकारी जयपाल सिंह व मोटागांव थानाप्रभारी रमेशचन्द्र पाटीदार भी घटनास्थन पर पहुंचे। पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी के नेतृत्व में करीब 100 पुलिसकर्मी, एक दर्जन से अधिक वाहन और सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मध्यरात्रि तक मौके पर मौजूद रहे। घाटोल डीएसपी मेघवंशी और अन्य अधिकारी लोगों से लगातार समझाइश करते रहे, लेकिन देर रात तक आक्रोशित लोग नहीं माने और पुलिस को गांव में आगे बढ़ने से रोकते रहे।

आग में बदला आक्रोश, बेघर हुए दर्जनों लोग

हत्या के बाद भड़की हिंसा ने पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया। आरोपियों के कच्चे, टिनशेड कवेलूपोश मकानों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे घरों का सारा सामान जलकर राख हो गया। जिन घरों में लोग रहते थे, वहां से करीब 50 से 60 लोग जान बचाकर भाग निकले। खेत-खलिहानों में भी आगजनी की गई, हालांकि उस समय फसल नहीं थी। मवेशियों का क्या हुआ, यह देर रात तक स्पष्ट नहीं हो पाया। दो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके तक पहुंचने से पहले ही करीब 200 मीटर दूर रोक दी गईं, जिससे आग देर रात तक धधकती रही और पूरा इलाका दहशत में डुबा रहा।

अंदर का गांव, बाहर से कटा हुआ

यह गांव बांसवाड़ा-उदयपुर स्टेट हाइवे से करीब दो किलोमीटर अंदर सली पीपली मार्ग पर बसा है। करीब 40 से 50 घरों और लगभग 300 लोगों की आबादी वाला यह गांव रविवार रात पूरी तरह तनाव, हिंसा और आगजनी की चपेट में रहा। पुलिस गोविन्द के शव को एमजी अस्पताल बांसवाडा ले जाने का प्रयास करती रही, लेकिन आक्रोशित परिजनों ने देर रात तक शव नहीं उठाने दिया।

यह है घटनाक्रम की टाइमलाइन

5 बजे बाद ईसरवाला से बारात लौटी, जिसमें गोविन्द भी अपने घर आया।
6 बजे के करीब 25 वर्षीय गोविन्द मईड़ा पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया गया।
7 बजे अंधेरा ढलते ही मृतक पक्ष के लोगों ने आरोपियों के घर फूंकने शुरू कर दिए।
7:30 बजे तक मोटागांव थाने और बस्सीआड़ा चौकी से पुलिस जाब्ता मौके पर पहुंचा।
7:35 बजे पुलिस पर ग्रामीणों ने पथराव कर दिया।
8 बजे आरोपी परिवार पूरी तरह गांव से भाग चुके थे।
9 बजे दो फायरब्रिगेड पहुंची, जिसे भी घटनास्थल तक नहीं पहुंचने दिया गया।
11 बजे रात तक घर जलते रहे और सारा सामान खाक हो गया।
1 बजे रात तक पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी जाब्ते के साथ मौके पर मौजूद रहे।

Updated on:
27 Apr 2026 09:06 am
Published on:
27 Apr 2026 08:53 am