नजदीकी अधिकारी व कर्मचारियों में सताने लगा कई मामलों की जांच का डर
बारां. बारां जिला कलक्टर रहे इन्द्र सिंह राव को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच टीम द्वारा बुधवार शाम को जयपुर में गिरफ्तार कर लिए जाने से जिले में खासी चर्चा रही। गिरफ्तारी में हुए विलम्ब को लेकर कई लोग कई तरह के कयास लगाते रहे। वहीं प्रशासनिक हल्कों में इस गिरफ्तारी से हड़कम्प मच गया। कई अधिकारी खासकर राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी व कर्मचारी एसीबी की इस कार्रवाई के बाद कुछ अन्य पुराने मामले खुलने की संभावना से सहमे हुए हैं। गत 9 नवम्बर की शाम को जिला कलक्टर के निजी सहायक (पीए) को पेट्रोल पम्प के लिए एनओसी जारी करने की एवज में 1.40 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इस दिन रात को जिला कलक्टर राव से एसीबी की टीम ने एएसपी ठाकुर चंद्रशील की अगुवाई में लगभग 10 घंटे पूछताछ की थी। इसके अलावा कलक्टर कार्यालय से राजस्व समेत अन्य प्रकरणों से सम्बन्धित कई पत्रावलियां जब्त की थी। इसके बाद से एसीबी की जांच टीम के सदस्य प्रतिदिन जिला कलक्टर कार्यालय से भ्रष्टाचार के संभावित मामलों की पत्रावलियों के अलावा कार्यालय के फोन नम्बर की कॉल डिटेल, फैक्स मशीन के डाटा भी एकत्रित कर रहे थे। एसीबी के सूत्रों का कहना है कि जिला कलक्टर राव के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद उनकी गिरफ्तारी की गई है।
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नजदीकी अफसरों की उड़ी हैं नींद
रिश्वत मामले में पीए नागर की अधिकारी के बाद कई और अधिकारी बेचैन हैं, जो जिला कलक्टर राव के खासे करीबी थे। इनमें एक अधिकारी तो प्रोटोकॉल के तहत प्रशासनिक बैठकों में भाग लेने के लिए अधिकृत नहीं होने के बावजूद उनमें शामिल रहता था। इस अधिकारी उसके पद विरुद्ध लगाया हुआ है। इतना ही नहीं कई राव के जिला व प्रदेश के नेताओं से मधुर सम्बंधों की चर्चा भी आम होने लगी है।
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खुलेगा सरकारी आवास का ताला
राव को 9 दिसम्बर को राज्य सरकार ने एपीओ कर दिया था। वे एसीबी की ओर से दस घंटे तक की गई जांच से छूटने के बाद अपने सरकारी आवास पर ताला लगाकर चले गए थे। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी के बाद अब इस आवास का ताला खुलने के साथ इसकी तलाशी लेने की संभावनाएं भी प्रबल हो गई हैं।
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पत्रावलियां ले गई थी एसीबी टीम
कलक्टर राव के पीए महावीर नागर को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तर किए जाने के बाद एसीबी कोटा की टीम ने जिला कलक्टर कार्यालय की राजस्व शाखा से कई पत्रावलियां भी जांच के लिए अपनी सुपुर्दगी में ली थी। इससे कार्यालय की राजस्व शाखा में कार्यरत कर्मचारी सहमे हुए हैं। इनमें एक राजस्व कर्मचारी का नाम भी पीए नागर ने रिश्वत का हिस्सा देने के लिया था। इनके अलावा बाद में अन्य शाखाओं की पत्रावलियां एसीबी ने खंगाली थी। ऐसे में इन पत्रावलियों के देख रहे कर्मचारी भी संदेह के दायरे में आ सकते हैं।