
Bareilly News: फर्जी फर्मों और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन के मामले में मंगलवार को बड़ा खुलासा हुआ। जीएसटी विभाग, विशेष जांच दल और कैंट पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में फरजान हाशमी के साथ कथित मास्टरमाइंड सागर अग्रवाल समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में विनीत अरोरा, अनुज अग्रवाल और शिवम गुप्ता उर्फ लाला भी शामिल हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि किसी की भूमिका बोगस फर्मों के रिटर्न भरने में थी तो कोई कैश सेटलमेंट और रकम को घुमाकर कथित लाभार्थी फर्मों तक पहुंचाने का काम करता था।
पुलिस लाइन में पत्रकार वार्ता के दौरान एसपी क्राइम मनीष सोनकर ने बताया कि किला क्षेत्र निवासी फरजान हाशमी जीएसटी अधिकारियों की कार्रवाई के बाद बरेली से फरार हो गया था। इसके बाद उसने नेपाल में ठिकाना बना लिया। वहां पहचान छिपाने के लिए वह कथित तौर पर संदीप नाम से रह रहा था। आरोप है कि फरारी के दौरान भी वह अपने साथियों के संपर्क में था।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में फरजान हाशमी पुत्र स्व. अनवर हाशमी, निवासी 103 गरईया बड़ा बाजार, थाना किला, बरेली शामिल है। करीब 36 वर्षीय फरजान को फर्म स्वामी बताया गया है। दूसरा आरोपी सागर अग्रवाल पुत्र रामअवतार, निवासी लिकर इनक्लेव कॉलोनी, कर्मचारी नगर, थाना इज्जतनगर है। पुलिस ने सागर को इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड और मुख्य सरगना बताया है। आरोप है कि वह लाभ प्राप्त करने वाली फर्मों और बोगस आईटीसी तैयार करने वाली फर्मों के बीच अहम कड़ी था। तीसरा आरोपी विनीत अरोरा पुत्र मुनेन्द कुमार, निवासी ख्वाजा कुतुब, थाना कोतवाली है। पुलिस के मुताबिक नेटवर्क में उसकी कथित भूमिका कैश सेटलमेंट की थी। चौथा आरोपी अनुज अग्रवाल पुत्र राकेश कुमार, निवासी खैरुल्ला गली, थाना कोतवाली है। आरोप है कि वह बोगस फर्मों के जीएसटी रिटर्न भरने का काम करता था। पांचवां आरोपी शिवम गुप्ता उर्फ लाला पुत्र शिवशंकर गुप्ता, निवासी नीम की चढ़ाई, बड़ा बाजार, बरेली है। शिवम रकम को अलग-अलग माध्यमों से घुमाने और ठिकाने लगाने के साथ हवाला के जरिए बेनीफिशियरी फर्मों और सागर अग्रवाल तक रकम पहुंचाने में भूमिका निभाता था।
जांच में सामने आया है कि डीएम कंपाउंड के सामने एक कार्यालय से कथित फर्जी बिलिंग का काम किया जाता था। आरोप है कि यहां विनीत अरोरा, अनुज अग्रवाल और फरजान हाशमी समेत नेटवर्क से जुड़े लोग बैठते थे। बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के बिल तैयार कर कागजों पर कारोबार दिखाया जाता और इसके आधार पर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने का खेल चलता था। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार सागर अग्रवाल की भूमिका इस पूरे मामले में बेहद अहम सामने आई है। उसे बोगस आईटीसी तैयार करने वाली फर्मों और उसका लाभ प्राप्त करने वाली फर्मों के बीच की मुख्य कड़ी बताया गया है। आरोप है कि फर्जी फर्मों के जरिए कागजी लेनदेन दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
पूछताछ में फरजान ने कथित तौर पर बताया कि फर्जी फर्म बनवाने के एवज में उसे 50 हजार रुपये दिए गए थे। इसके बाद उसके घर के पते पर एफएस ट्रेडर्सनाम से फर्म खुलवाई गई। पुलिस अब इस फर्म के बैंक खातों, जीएसटी रिटर्न और इससे जुड़े लेनदेन की जांच कर रही है। जांच में दिल्ली के आसिफ नाम के व्यक्ति से फर्जी आधार और पैन कार्ड हासिल करने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल अलग-अलग नामों से फर्म तैयार करने में किया गया। जांच में एफएस ट्रेडर्स, सिद्धि विनायक एंटरप्राइज, मां एंटरप्राइज, नाइट स्टार, आर्ट लाइफ हुड्डा, आर्ट लाइफ एसोसिएट, अरहम एग्रो फूड्स और केएच एंटरप्राइज समेत कई फर्मों के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसियां इनके जीएसटी रिटर्न, बैंक खातों और आपसी लेनदेन की कड़ियां जोड़ रही हैं।
जांच में सामने आए बैंक खातों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन होने की बात कही गई है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इसमें वास्तविक कारोबार कितना था, बोगस बिलिंग कितनी हुई, कितना फर्जी आईटीसी लिया गया और सरकारी राजस्व को वास्तविक नुकसान कितना पहुंचा। पुलिस के मुताबिक शिवम गुप्ता उर्फ लाला की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा रकम के मूवमेंट और हवाला नेटवर्क तक पहुंच गया है। आरोप है कि शिवम रकम को घुमाने और ठिकाने लगाने के बाद हवाला के माध्यम से बेनीफिशियरी फर्मों तथा सागर अग्रवाल तक पहुंचाता था। जांच एजेंसियां अब इस कथित मनी ट्रेल की परतें खोलने में जुटी हैं।
इसी प्रकरण में इससे पहले सद्दाम हुसैन और मोहम्मद समद उर्फ शाहरुख को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब फरजान हाशमी, सागर अग्रवाल, विनीत अरोरा, अनुज अग्रवाल और शिवम गुप्ता उर्फ लाला की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही हैं। फरजान के कब्जे से एक लैपटॉप, चार्जर, माउस और छह मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से फर्जी फर्मों, बिलिंग, बैंक ट्रांजेक्शन और नेटवर्क के दूसरे लोगों से संबंधित महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।