बरेली

संत प्रेमानंद से गजब का प्रेम: कीलों की सेज पर दंडवती लगाते हुए 27 दिन में बरेली से वृंदावन पहुंचा भक्त

Bareilly News: बरेली के सौरभ कश्यप ने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए कीलों की सेज पर दंडवती लगाते हुए 27 दिनों में वृंदावन की यात्रा पूरी की। दर्शन के बाद उन्होंने श्रीबांकेबिहारी मंदिर में पूजा-अर्चना की और ब्रज चौरासी कोस यात्रा की शुरुआत की।
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Jul 09, 2026
bareilly devotee reaches vrindavan dandvat for premanand
संत प्रेमानंद से गजब का प्रेम

Bareilly Devotee Vrindavan Journey: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के प्रति श्रद्धा और भक्ति का एक अनोखा उदाहरण सामने आया है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले एक युवक ने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने के लिए ऐसा कठिन संकल्प लिया, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया। युवक ने बरेली से वृंदावन तक की पूरी यात्रा कीलों की सेज पर दंडवती लगाते हुए पूरी की। लगभग 27 दिनों तक लगातार कठिन तपस्या जैसी यात्रा करने के बाद वह वृंदावन पहुंचा और सबसे पहले संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

सोशल मीडिया से शुरू हुई श्रद्धा

जानकारी के अनुसार बरेली जिले के गांव व्योधन खुर्द निवासी सौरभ कश्यप पिछले काफी समय से सोशल मीडिया के माध्यम से संत प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुन रहे थे। उनके आध्यात्मिक विचारों और भक्ति मार्ग से सौरभ इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने स्वयं वृंदावन जाकर संत के दर्शन करने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे उनके जीवन में राधे-राधे नाम का जप भी शामिल हो गया और इसी श्रद्धा ने उन्हें इस कठिन धार्मिक यात्रा के लिए प्रेरित किया।

कीलों की सेज पर दंडवती लगाकर तय किया लंबा सफर

सौरभ कश्यप ने अपने साथी गोपी के साथ मिलकर इस अनोखी यात्रा की शुरुआत की। उन्होंने पहियों वाले एक लकड़ी के पट्टे पर कीलें लगाईं और उसी पर लेटकर दंडवती करते हुए बरेली से वृंदावन तक का सफर तय किया। यह यात्रा आसान नहीं थी, लेकिन मजबूत आस्था और विश्वास के बल पर उन्होंने लगभग 27 दिनों में यह कठिन दूरी पूरी कर ली। रास्ते में जहां भी लोग उन्हें देखते, उनकी श्रद्धा और समर्पण की चर्चा करने लगते।

संत प्रेमानंद के दर्शन के बाद पहुंचे श्रीबांकेबिहारी मंदिर

वृंदावन पहुंचने के बाद सौरभ सबसे पहले संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे और उनके दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में दर्शन किए। अपनी इस धार्मिक यात्रा को यहीं समाप्त नहीं किया, बल्कि उन्होंने ब्रज की प्रसिद्ध चौरासी कोस यात्रा भी शुरू कर दी। उनका कहना है कि वृंदावन पहुंचना उनके जीवन का सबसे यादगार आध्यात्मिक अनुभव है।

बिना किसी मनोकामना के निकले थे धर्म यात्रा पर

सौरभ कश्यप ने बताया कि उन्होंने यह यात्रा किसी व्यक्तिगत इच्छा या मनोकामना की पूर्ति के लिए नहीं की। उनका उद्देश्य केवल संत प्रेमानंद महाराज और ठाकुरजी के दर्शन करना था। उन्होंने कहा कि वह प्रतिदिन संत के प्रवचन सुनते हैं और राधे-राधे नाम का जप करते हैं। उनके अनुसार यह पूरी यात्रा संत प्रेमानंद महाराज और ठाकुरजी की कृपा से ही संभव हो सकी।

श्रद्धा और समर्पण की कहानी बनी चर्चा का विषय

सौरभ कश्यप की यह अनोखी दंडवत यात्रा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया पर भी उनकी भक्ति और समर्पण की खूब सराहना की जा रही है। कई श्रद्धालु इसे गुरु भक्ति, विश्वास और आध्यात्मिक समर्पण का दुर्लभ उदाहरण मान रहे हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जिस धैर्य और श्रद्धा के साथ यह यात्रा पूरी की, वह कई लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बन गई है।

Updated on:
09 Jul 2026 05:10 pm
Published on:
09 Jul 2026 05:10 pm